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फास्ट फूड खाकर मिटाई थी भूख, यूक्रेन से लौटे विद्यार्थियों ने बताए हालात

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यूक्रेन से वापसी पर रिहार निवासी तान्या पाण्डेय का लख़नऊ रेलवे स्टेशन पर माला डालकर स्वागत करते ? - फोटो : SITAPUR
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सीतापुर (तंबौर)। यूक्रेन में छिड़े युद्ध के बीच रविवार को दो और विद्यार्थी सकुशल घर लौट आए हैं। विद्यार्थियों ने बताया कि यूक्रेन के हालात बहुत खराब हैं। हर तरफ से गोलाबारी की आवाज आती थी। बंकर में खाने पीने का संकट खड़ा हो गया था। दो दिन तक किसी तरह फास्ट फूड खाकर जान बचाई थी। एक छात्र यूक्रेन से दिल्ली पहुंच गया है। देर रात तक सीतापुर आने की उम्मीद जताई जा रही है। अब तक यूक्रेन से पांच छात्र वापस आ चुके हैं।
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यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई करने गई क्षेत्र के ग्राम रिहार निवासी तान्या पांडेय रविवार को ट्रेन से लखनऊ पहुंची। उनके माता-पिता, भाई व दादी बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। जैसे ही ट्रेन चारबाग रेलवे स्टेशन पर रुकी, परिजनों की खुशी का ठिकाना न रहा। निर्भीक बेटी उनके सामने खड़ी थी। पिता पंकज पांडेय, उनकी पत्नी, पुत्र व अन्य परिजन उससे लिपटकर भावुक हो गए। तान्या यूक्रेन युद्ध को याद कर सिहर उठती है।
वह बताती है कि युद्ध शुरू होने के बाद मेडिकल यूनिवर्सिटी द्वारा सभी छात्रों को उसी कैम्पस में बने अंडरग्राउंड बंकर में भेज दिया गया। चार दिनों तक खाने पीने की कोई दिक्कत नहीं थी। लेकिन चारों तरफ का माहौल सुनकर काफी भय लगता था। पांचवें दिन से खाने के लिए केवल फास्ट फूड के पैकेट ही मिले। साफ पानी की किल्लत हो गई। बाहर का पानी पीने से दो दिन तक बुखार भी रहा।
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नेटवर्क की दिक्कत से परिजनों से बात नहीं हो पाई। तीन मार्च को दूतावास से स्लोवाकिया बॉर्डर पहुंचने की सूचना मिली। वहां होटल में पहुंचकर कुछ सुकून मिला। एक दिन वहां रुकने के बाद फ्लाइट का नंबर लगा, जिसमें सवार होकर शनिवार रात दिल्ली उतरने के बाद ट्रेन से लखनऊ पहुंची। मेरे साथ रह रहे खारकीव मेडिकल कॉलेज के सभी छात्र-छात्राएं वहां से निकल गए हैं।
गोलीबारी की आवाज से सहम गए थे सभी
सिधौली (सीतापुर)। यूक्रेन में युद्ध की भयावह त्रासदी के मध्य सकुशल लौटे कस्बे के बाजार मोहल्ला निवासी आदित्य प्रताप सिंह ने बताया कि जब वे कीव में थे, अचानक गोलीबारी की आवाजें आनी लगी। कॉलेज प्रशासन की तरफ से बंकर में जाने का एनाउंस कर किया गया। बंकर में पहुंचते ही सभी छात्र डर रह थे। ऐसा लग रहा था कि अब शायद ही जीवित बच पाए। घर से भी बहुत कम बात हो पा रही थी।
उन्होंने बताया कि मां-पापा व बहन सभी का चेहरा हर समय आंखों में तैरता रहता था। उसी दौरान खारकीव में कर्फ्यू हटने व सुपर मार्केट खुला होने की जानकारी मिली। जब कई भारतीय सामान लेने के लिए सुपर मार्केट पहुंचे, वहां यूक्रेन के मूल निवासियों में सामान पहले लेने की होड़ मचा रखी थी। इस कारण भारतीय लोगों को सबसे पीछे धकेल दिया गया। उसी दौरान रूसी सेना की ओर से हुई फायरिंग में कर्नाटक के निवासी एक छात्र की मौत हो गई।
उसके बाद दूतावास की ओर से अफरातफरी में संदेश दिया गया कि भारतीय लोग सुबह कर्फ्यू हटने पर आठ बजे कीव रेलवे स्टेशन पहुंचे। जहां से उन्हें स्लोवाकिया बॉर्डर ले जाया जाएगा। हम 72 लोग करीब 10 किमी पैदल चलकर रेलवे स्टेशन पहुंचे। जहां ट्रेन में भारतीयों को यूक्रेन के मूल निवासी चढ़ने नहीं दे रहे थे। काफी मारपीट धक्कामुक्की के बाद हम लोग ट्रेन में सवार हुए तो टीटीई के टिकट मांगने पर जब नहीं दिखा सके तो 700 डॉलर सभी ने मिलाकर उसे दिए। जिस पर उसने हमें ट्रेन में उजगरोडे तक बैठने दिया।
उजगरोडे से बस से तीन किमी का सफर तय किया। फिर आठ किमी पैदल चलना पड़ा। उसके बाद स्लोवाकिया बॉर्डर पहुंचे। यहां भी काफी भीड़ थी। यहां 210 भारतीय थे। जिनका पासपोर्ट जमा करवाकर रिफ्यूजी के रूप में स्लोवाकिया देश में प्रवेश मिला। यहां के गेस्ट हाउस में थोड़ा सुकून मिला। कोसिस शहर का एयरपोर्ट छोटा होने के कारण दो फ्लाइट को रनवे पर नहीं उतारा जा सकता था। इसलिए फ्लाइट मिलने में थोड़ा इंतजार करना पड़ा। यहां से हम भारत सरकार के प्रयासों से घर आ सके। आदित्य ने भारत सरकार को आभार व्यक्त किया।
तबियत बिगड़ने पर हुई इमरजेंसी लैंडिंग
यूक्रेन से घर लौटै सिधौली कस्बे के बाजार मोहल्ले निवासी आदित्य प्रताप सिंह ने बताया कि स्लोवाकिया से दिल्ली उड़ान भरने के बाद विमान में एक छात्रा की हालत मिर्गी के कारण काफी बिगड़ गई थी। जिसके बाद विमान की आपातकालीन इस्ताम्बुल में लैंडिंग करवानी पड़ी। जिसमें कुछ घंटों की देरी हुई। उन्होंने बताया कि यूक्रेन में भारतीय दूतावास द्वारा बहुत अच्छी मदद नहीं मिल सकी थी लेकिन उसके बाद स्लोवाकिया से लेकर लखनऊ तक सभी स्थानों पर बेहतर सेवाएं भारत सरकार द्वारा प्रदान की गई।
दिल्ली पहुंचा शादाब, जल्द होगा अपनों के पास
बिसवां (सीतापुर)। बिसवां के चंदन महमूदपुर निवासी शादाब मेडिकल की पढ़ाई करने यूक्रेन गया था। वह वहां पर फंस गया था। लेकिन अब वह वतन वापसी कर रहा है। चाचा हसीब ने बताया कि शादाब स्लोवाकिया होता हुआ दिल्ली पहुंच गया है। दिल्ली में यूपी सरकार ने उसे रिसीव करते हुए यूपी भवन ले गई, जहां पर भोजन व नाश्ता करने के बाद अब वह कार से सीतापुर आ रहा है। उम्मीद है कि देर रात तक वह सीतापुर पहुंच जाएगा।
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