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शहर के अंदर बेधड़क दौड़ रहे भारी वाहन

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रोडवेज बस स्टैंड के पास नो इंट्री में गुजरता ट्रक। - संवाद - फोटो : SITAPUR
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सीतापुर। शहर में चल रहे भारी वाहन हादसों का सबक बन रहे हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार इन पर कार्रवाई नहीं कर पा रहे है। एक दिन पहले शहर के अंदर हुई दुर्घटना में दो लोगों की मौत हो गई थी। फिर भी इस घटना के बाद जिम्मेदारों ने कोई सबक नहीं लिया। रविवार को सुबह से लेकर शाम तक तमाम भारी वाहन शहर की सड़कों के बीच चलते हुए दिखाई दिए। इन भारी वाहनों के साथ ई-रिक्शा, बाइक व साइकिल सवार भी गुजर रहे थे। इससे इन लोगों की जान पर खतरा बना हुआ है।
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शहर के मालगोदाम के पास शनिवार को एक ट्रक ने ई-रिक्शा में जोरदार टक्कर मार दी थी। टक्कर इतनी तेज थी कि मौके पर ही दो लोगों की मौत हो गई थी। अन्य दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। अमर उजाला ने इस घटना के बाद रविवार को शहर के अंदर नो इंट्री के समय चल रहे वाहनों की रियलटी परखी तो हर तरफ भारी वाहन ही दिखाई दिए। शहर के रोडवेज बस स्टॉप से लेकर मालगोदाम, लालबाग चौराहा, जीआईसी चौराहा, चुंगी चौराहा के बीच तमाम भारी वाहन गुजरते रहे।
इन वाहनों के बीच से ही ई-रिक्शा, बाइक व छोटे वाहन गुजर रहे थे। कई जगहों पर भीड़भाड़ दिखाई दी। इसके बावजूद इनकी रफ्तार शहर में कम नहीं हो रही थी। इन वाहनों के बीच से ही लोग निकल रहे थे। जबकि एक दिन पहले हुई घटना के बाद भी जिम्मेदार अफसरों ने कोई सबक नहीं लिया। अफसरों की यह लापरवाही ही आम लोगों की जान पर भारी पड़ सकती है।
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जरा सी गलती और हो सकता बड़ा हादसा
शनिवार को मालगोदाम के निकट हादसा हुआ था। दोपहर करीब चार बजे वहां से चंद कदमों की दूरी पर ही एक ट्रक जा रहा था और उसके आगे ई-रिक्शा चल रहा था। कैमरे में कैद हुए चित्र को देखें तो लगता है कि अगर जरा सी भी लापरवाही ट्रक चालक की ओर से हुई तो आगे जा रहा ई-रिक्शा उसकी चपेट में आ जाएगा। शहर के जीआईसी चौराहे के पास भी ऐसा ही नजारा था। जहां आबादी के बीच भारी वाहन गुजर रहे थे। उनमें सामान भी लोड था। अक्सर यही ट्रक शहर की घनी आबादी में भी पहुंच जाते हैं, जिसके कारण घंटों जाम लगता है और हादसे भी हो जाते हैं।
शहर के माल गोदाम तक ही कुछ भारी वाहन दिन में आ सकते हैं। शहर के अन्य स्थानों पर बिना अनुमति जाने नहीं दिया जाता है। अगर कोई निकलता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाती है।
- फरीद अहमद, टीआई
परिवहन निगम की बसें भी तोड़ती हैं नियम
बसें शहर की सीमा में रात आठ बजे के बाद ही प्रवेश कर सकती हैं, लेकिन बस चालक शाम ढलते ही बसों को उन रूट से लेकर लाते हैं जहां नो इंट्री है। टीआई ने बताया कि कई बार ऐसी बसों का चालान भी किया गया। परिवहन निगम की बसें रोकने पर उनके जिम्मेदार लोग नाराजगी व्यक्त करते हैं। मजबूरन उनको जाने दिया जाता है। एआरएम राकेश कुमार का कहना है कि सभी डिपो को पत्र जारी कर अवगत कराया जाएगा कि वह समय से पूर्व नो इंट्री में प्रवेश न करें।
शहर में चल रहीं ट्रांसपोर्ट कंपनियां
शहर के अंदर ही कई ऐसे प्राइवेट ट्रांसपोर्ट है, जहां पर ट्रकों का आना-जाना हर समय लगा रहता है। शहर के बीच ट्रांसपोर्ट होने के कारण अक्सर लोग परेशान होते हैं। इससे एक तो जाम लगता है, दूसरी ओर दुर्घटना होने का खतरा बना रहता है। इस ओर जिम्मेदारों का भी ध्यान नहीं जाता है। अगर यह ट्रांसपोर्ट शहर से बाहर कर दिया जाए तो शायद हादसों पर लगाम लग सकती है।
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