सीतापुर। जिला अस्पताल के पांच चिकित्सकों का गैर जनपद तबादला हो गया है। सोमवार को रिलीव से पहले ही पांचों चिकित्सक अस्पताल से नदारद हो गये। इससे जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गईं। कई मरीज घंटों इंतजार करते रहे पर डॉक्टर नहीं मिले। इससे कई मरीजों ने लंबी लाइन लगाकर दूसरे डॉक्टर को दिखाया तो कई मायूस होकर वापस लौट गये।
जिला अस्पताल में पहले ही 18 चिकित्सकों की कमी थी। इधर, दो दिन पहले जिला अस्पताल के पांच चिकित्सक गैर जनपद स्थानांतरण कर दिए गये। इन सभी को सोमवार को रिलीव करने के लिए कागजात तैयार किए जा रहे थे। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि कोई छुट्टी लेकर चला गया है तो कोई बिना जानकारी के ही अस्पताल नहीं आया।
रामकोट कस्बे के रामू सुबह नौ बजे जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. जेएन सिंह को तलाश रहे थे। पहले वह ओपीडी में गए। जब वह नहीं मिले तो वह फिर इमरजेंसी पहुंचे। वहां पर भी न मिलने पर वह मायूस होकर लौट गए। श्याम अपने बच्चे को डॉ. विजय वर्मा को दिखाने के लिए डॉक्टर के बारे में जानकारी कर रहे थे। उनको भी डॉक्टर नहीं मिले। कुछ इसी तरह से तमाम मरीज सोमवार को अस्पताल में डॉक्टरों को तलाशते रहे। लेकिन डॉक्टर रिलीव होने से पहले ही छुट्टी लेकर चले गये। मजबूरी में किसी ने दूसरे को दिखाया तो कई लोग वापस लौट गये।
सुबह आठ बजे के बाद अस्पताल में मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ी। पर्चा काउंटर से लेकर दवा व ओपीडी में मरीज ही मरीज दिखाई दे रहे थे। सुबह 10 बजे सर्जन डॉ. गौरव मिश्रा का कमरा बंद मिला। उमेश ने बताया कि यहां पर आने पर पता चला कि वह ऑपरेशन कर रहे हैं। अब मंगलवार को ही मिल पाएंगे। 11 बजे मोहित को फिजीशियन डॉ. जेएन सिंह नहीं मिले तो वह घर लौट गए। पुराने सीतापुर से आई रेशमा ने बताया कि उनके बच्चे का इलाज डॉ. विजय वर्मा से चल रहा था। डॉ. विजय वर्मा का सुबह से इंतजार हो रहा है।
वह न तो ओपीडी में पहुंचे और न ही चिल्ड्रेन वार्ड में गए है। कोई सही जानकारी भी नहीं दे रहा है। इसी तरह से चर्म रोग विशेषज्ञ कुछ देर बैठे। उसके बाद वह भी ओपीडी से चले गये। इसके चलते मरीज दिनभर डॉक्टरों का इंतजार करते रहे। जब वह नहीं मिले तो मरीज वापस लौट गए।
वार्डों में नहीं पहुंचे चिकित्सक
जिला अस्पताल के मेडिकल वार्ड, महिला वार्ड में मरीज भर्ती हैं। इन मरीजों को देखने की जिम्मेदारी फिजीशियन की है। लेकिन डॉ. जेएन सिंह के अस्पताल न आने पर डॉ. अनुपम मिश्रा इलाज करते रह। डॉ. अनुपम मिश्रा की इमरजेंसी में ड्यूटी लगी होने से वह ओपीडी में नहीं बैठे। इससे फिजीशियन की कुर्सी खाली पड़ी रही। वार्डों में मरीज को कोई चिकित्सक देखने तक नहीं पहुंचा। इससे मरीज की अगर हालत बिगड़ती तो उसके परिजन इमरजेंसी में ही आकर दवाइयां हासिल करते।
पांच चिकित्सकों का तबादला हो गया है। रिलीव के प्रपत्र तैयार करवाए जा रहे है। जिन चिकित्सकों का ट्रांसफर हुआ है वह लोग सोमवार को अस्पताल नहीं आए थे। इसकी वजह से इलाज में कुछ दिक्कत आई थी।
- डॉ. आरके सिंह, सीएमएस, जिला अस्पताल