केस-1 टूटी पड़ी बाउंड्रीवाल
सकरन विकास खंड़ का स्वास्थ्य उपकेंद्र सरैंयाकला। बाउंड्रीवाल टूटी हुई पड़ी है। दीवारों से प्लास्टर छूट रहा है। पल्ले से दरवाजा चोरी हो चुके है। ग्रामीणों का कहना है जिस मकसद के लिए भवन बना था। वह आज तक पूरा नहीं हो सका। एएनएम के न आने से वह पूरी तरह से बेमानी साबित हो रहा है। ऐसी ही हालात महराजनगर स्वास्थ्य उपकेंद्र के है।
केस-2 झाड़ियों से घिरा एएनएम सेंटर
सकरन विकासखंड का स्वास्थ्य उपकेंद्र लश्करपुर का पांच वर्ष पूर्व निर्माण कराया गया था। उसके बाद ग्रामीणों को भरोसा जगा था कि टीकाकरण व अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए दूर नही जाना पड़ेगा। लेकिन यह उम्मीद बेमानी साबित हुई है। मौजूदा समय में एएनएम सेंटर बदहाली का शिकार है। सेंटर के चारो तरफ झाड़ियां उग आई है।
ये तो केस महज बानगी है। जबकि अधिकांश स्वास्थ्य उपकेंद्रों का यही हाल है। स्वास्थ्य कार्यकर्त्री के भवन में न बैठने से उनका प्रयोग नही हो पा रहा है। वहीं कई जगहों पर ग्रामीण कब्जा करके अपने घरेलू कामों में प्रयोग कर रहे है।
ऐसे में लोगों को टीकाकरण व अन्य सुविधाओं के लिए सीएचसी की ओर रुख करना पड़ता है। बच्चों का टीकाकरण व गर्भवती महिलाओं का गांव में ही नियमित चेकअप कराने के मकसद से लाखों की लागत से स्वास्थ्य उपकेंद्र बनाए गए है। इन केंद्रों पर स्वास्थ्य कार्यकर्त्री के माध्यम से सेवाएं दी जाती है।
ग्रामीणों के मुताबिक सेंटरों पर कभी कभार ही स्वास्थ्य कार्यकर्त्री आती है, ज्यादातर वह दूसरी जगह पर बैठकर चली जाती है। इससे टीकाकरण प्रभावित होता है।
चेकअप व अन्य सुविधाओं के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सांड़ा जाना पड़ता है। ऐसे में लाखों की लागत से बने भवन बेमानी साबित हो रहे है। इनका फायदा ग्रामीणों को नही मिल रहा है।
जांच के बाद होगी कार्रवाई
स्वास्थ्य कार्यकर्ती हर बुधवार व शनिवार को गांव जाकर टीकाकरण करती है। अगर कही पर स्वास्थ्य उपकेंद्र खुल नहीं रहे है तो इसकी जानकारी नहीं है जांचकर कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. अनूप पांडेय, सीएचसी प्रभारी, सांडा