नैमिषारण्य। बांके रमण बिहारी आश्रम में महामंडलेश्वर विद्यानंद सरस्वती के सानिध्य में मंगलवार को विमल मिश्र की तीन दिवसीय संन्यास न्यास दीक्षा प्रारंभ हुई। दीक्षा के पहले दिन भभूत स्नान और आत्म श्राद्ध कर खुद का पिंडदान करने की परंपरा निभाई गई। महामंडलेश्वर ने बताया कि संन्यासी जीवन ग्रहण करने वाला व्यक्ति रात में श्मशान घाट की धूनी से स्नान करता है। सुबह आचार्य द्वारा वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ उन्हें नया नाम दिया जाता है।
मिश्रिख निवासी विमल मिश्र को धार्मिक रस्म पूरी होने के बाद अब स्वामी विमलानंद सरस्वती के नाम से जाना जाएगा। उन्होंने बताया कि 16 अक्तूबर को सभी संत महंतों की उपस्थिति में महामंडलेश्वर विद्यानंद सरस्वती और साध्वी मुमुछा सरस्वती की ओर से स्वामी विमलानंद सरस्वती का पट्टाभिषेक कर अपना उत्तराधिकारी घोषित किया जाएगा। (संवाद)