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चुनाव में ताल ठोंकने के लिए बाहरी उम्मीदवार भी तैयार

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सीतापुर। पांच विधानसभा सीटों पर पुराने चेहरों को पार्टी की ओर से उतारने के बाद जिले की सियासी तासीर और गरमा गई है। तीन और सीटों पर बड़ी हसरतों के साथ चुनावी मैदान फतह करने की मंशा पाले जिले के उम्मीदवारों के साथ ही बाहरियों की आमद से चुनावी दंगल और रोमांचक हो चला है। चुनावी रण में ताल ठोंकने के लिए बाहरी भी तैयार हैं। बस, टिकट मिलने का इंतजार है।
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हालांकि, देखना दिलचस्प होगा कि टिकट फाइनल होने के बाद चुनावी माहौल में सियासत क्या गुल खिलाती है। चुनाव की रणभेरी बजने के साथ ही सियासत के कई रंग दिन पर दिन देखने को मिल रहे हैं। हर दिन राजनीति में हो रहे नए-नए घटनाक्रम चुनावी चौसर को और दिलचस्प बना दे रहे हैं। सभी दलों से उम्मीदवारों की लंबी-चौड़ी फौज है।
हालांकि, सबसे ज्यादा उम्मीदवार भाजपा में है, इसके बाद सपा और बाकी अन्य पार्टियों में। ऐसे में जनता की नुमाइंदी के बूते विधानसभा पहुंचने की मंशा वैसे तो हर उम्मीदवार ने पाल रखी होगी, लेकिन जनता किसे सिर माथे पर बिठाकर राजतिलक करती है, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी। इसके लिए 10 मार्च का इंतजार करना पड़ेगा।
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हां, इतना जरूर है कि चुनाव लड़ने के सुनहरे ख्वाबों को लेकर टिकट के लिए जोर आजमाइश कर रहे उम्मीदवारों का सियासी सफर टिकट के बाद ही तय होगा। इसके लिए सभी उम्मीदवार कोशिशों में लगे हैं। लखनऊ से लेकर दिल्ली तक की भागदौड़ जारी है, लेकिन इन सबके बीच दिलचस्प कहानी तो यह है कि टिकट की लाइन में लगे उम्मीदवारों में कई तो बाहरी भी हैं, जो चुनावी दंगल में ताल ठोंकने को बेकरार हैं।
पार्टी से जुड़े और किसी न किसी दायित्वों को संभाल रहे लोगों के अलावा बाहरी लोगों ने भी टिकट के लिए गोटियां बिछा रखी हैं। बाहरियों के टिकट के लिए दावेदारी करने से चुनावी समर ने और भी नया रंग ले लिया है। उम्मीदवारों की संख्या पर नजर दौड़ाई जाए तो भाजपा में ही अधिक हैं।
सदर, महोली, सिधौली विधानसभा क्षेत्र की सीटों पर बाहरियों ने नजर गड़ा रखी है। जबकि, शुक्रवार को पांच सीटों पर उतारे गए प्रत्याशियों में महमूदाबाद की प्रत्याशी भी बाहरी हैं। सियासी पंडितों की माने तो टिकट के लिए हर जतन करने में उम्मीदवार लगे हैं। अब उनकी मेहनत, कोशिशें कितना रंग लाती हैं, यह तो अभी कहना आसान नहीं है, लेकिन हां, बहुत जल्द ही सियासी तस्वीर सामने जरूर होगी।
सदर विधानसभा सीट को लेकर चर्चाएं तेज
भाजपा के लिए सदर विधानसभा की सीट सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है। 2017 में विधानसभा के चुनाव में जीते नगर विधायक राकेश राठौर पार्टी छोड़कर सपा में जा चुके हैं। ऐसे में पार्टी हाईकमान इस सीट को लेकर फूंक-फूंक कर कदम रखेगी। इस सीट पर टिकट के लिए वैसे तो काफी लोग लगे हैं, लेकिन चार-पांच नामों की चर्चा पिछले कुछ दिनों से ज्यादा तेज हुई है। इसी में एक नाम और भी है, जो बाहरी हैं। उनकी भी चर्चाएं अधिक हैं। पार्टी में अहम जिम्मेदारी भी संभाले हुए हैं।
महोली के लिए दावेदारों की लंबी फेहरिस्त
महोली विधानसभा सीट से शशांक त्रिवेदी 2017 में विधायक बने थे। वह इस बार भी टिकट के लिए लगे हैं, लेकिन यहां भी टिकट के लिए दावेदारों की लंबी फेहरिस्त है। दो से तीन ऐसे नाम इन दिनों चुनावी बयार में बह रहे हैं, जो बाहरी हैं। इसमें सबसे अधिक चर्चा एक माननीय की पत्नी भी है। वह हाल ही में पार्टी में शामिल भी हुए थे। हालांकि, बात अंदरखाने चल रही है। अभी खुलकर सामने नहीं आई है।
महमूदाबाद से आशा आजमाएंगी किस्मत
महमूूदाबाद विधानसभा सीट पर भाजपा से टिकट के लिए 18 लोगों ने आवेदन किए, लेकिन इसमें सबसे अधिक मजबूत दावेदारी एक आशा मौर्या की मानी जा रही है। मूल रूप से लखनऊ की निवासी हैं। पिछली बार भी चुनाव लड़ीं थी, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया था। इस बार उन्हें फिर से टिकट मिला है।
सिधौली में 41 साल से नहीं खिला कमल
सिधौली विधानसभा सीट पर भी एक बाहरी की नजर है। लखनऊ के निवासी हैं। टिकट के लिए पूरी ताकत से लगे हैं। अब टिकट मिलता है या नहीं, कहना जल्दबाजी होगी। हालांकि, भाजपा यहां 41 सालों से कमल नहीं खिला सकी है। ऐसे में पार्टी की इस बार पूरी कोशिश होगी सभी समीकरणों को बिठाने के बाद चुनावी नैया पार लगाने वाले को ही टिकट दी जाए। चर्चाएं यह भी हैं एक सांसद अपने पुत्र के लिए सियासी बिसात बिछा रहे हैं।
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