दो साल में प्रधानों पर दर्ज हुए 23 केस, अपात्रों को आवास दिलाने का हर जतन कर रहे जिम्मेदार
सीतापुर। प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना में अपात्रों को आवासीय सुविधा देने का खेल थम नहीं रहा है। अपात्रों को आवास आवंटित करने को प्रधान व पंचायत सचिव सर्वाधिक अनियमितताएं कर रहे हैं। कहीं पर आईडी बदलकर दूसरे को आवास आवंटित किए जा रहे हैं तो कहीं पर स्थाई पात्रता सूची में पात्रों का अपात्र बनाया जा रहा है।
शिकायतों पर विभागीय स्तर पर कार्रवाई भी हो रही है। बीते दो बरस में सर्वाधिक अनियमितताएं की गईं। अकेले अखिल भारतीय मताधिकारी संघ की शिकायत में 4178 लाभार्थी अपात्र मिले, फिर भी किसी अफसर पर कार्रवाई नहीं हुई। पीएम ग्रामीण आवास योजना का संचालन डीआरडीए की ओर से किया जा रहा हैं।
इस योजना में सर्वाधिक गड़बड़ी वर्ष 2016-17 व 2017-18 में की गई। अपात्रों को बड़ी संख्या में आवास बनाने को राशि दी गई। अखिल भारतीय मताधिकारी संघ के मुख्य कार्यकर्ता पीएन कलकी ने इस संबंध में जिला प्रशासन से 11 ब्लॉकों की 110 ग्राम सभाओं में की गई गड़बड़ी की शिकायत की।
इसकी जांच हुई तो इसमें 13 हजार 579 पात्र लाभार्थियों में से 4178 लाभार्थी अपात्र पाए गए। मामले ने तूल पकड़ा तो तत्कालीन सीडीओ ने संबंधित बीडीओ को पत्र भेजकर दोषी प्रधान व पंचायत सचिवों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इसके बाद मामला फाइलों में बंद हो गया।
कमोवेश प्रत्येक ब्लॉक से अपात्रों का पीएम आवास देने की शिकायतें ब्लॉक से जिला मुख्यालय तक आईं। तत्कालीन पीडी राजेश कुमार त्रिपाठी पीएम आवास में खासे चर्चा में रहे कि वह दोषी जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। इससे अनियमितताओं पर रोक नहीं लग सकी। अभी भी तत्कालीन 506 लाभार्थियों से वसूली की जानी है।
23 एफआईआर के साथ 111 प्रधानों के विरुद्ध 95 जी के तहत कार्रवाई की गई जबकि किसी भी अफसर के विरुद्ध कार्रवाई नहीं हुई। केवल छह कर्मचारियों का ही निलंबन हुआ। एक के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की गई। 66 वर्करों को चेतावनी देते हुए 39 कर्मचारियों को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई। एक करोड़ 15 लाख 80 हजार रुपए अभी वसूलने बाकी हैं।
बीते दो साल के नहीं बन पाए 4645 आवास
वित्तीय वर्ष 2016-17 व 2017-18 के अभी तक 4645 आवास नहीं बन सके हैं। दो बरस में 70,958 आवास बनाए जाने का लक्ष्य था। इसके सापेक्ष 66,313 आवास ही बने हैं।
पीएम आवास योजना में अनियमितताओं की जांच के बाद दोषी कर्मचारियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। जो राशि वसूली के लिए शेष है, उसे वसूलने के निर्देश दिए गए हैं।
-अरुण कुमार सिंह, परियोजना निदेशक डीआरडीए
ऑपरेटर की होगी सेवा समाप्ति
लहरपुर (सीतापुर)। ब्लॉक लहरपुर के दरियापुर में ग्राम से ब्लॉक तक के जिम्मेदारों की मिलीभगत से अपात्रों को आवासीय सुविधा का लाभ दिया गया था। यह मामला जांच में सही पाया गया है। इसे गंभीरता से लेते हुए डीएम ने संबंधित कंप्यूटर ऑपरेटर की सेवा समाप्ति के निर्देश दिए हैं।
साथ ही ब्लॉक के संबंधित अकाउंटेंट, पंचायत सचिव एवं ग्राम प्रधान से दुरुपयोग की गई राशि की वसूली की जाएगी। इसकी पुष्टि पीडी अरुण कुमार सिंह ने की है।