रामपुर मथुरा (सीतापुर)। आवास के लिए जमीन आवंटित होने के बाद भी कटान पीड़ित सात परिवार तटबंध पर ही झोपड़ी बना कर गुजर-बसर कर रहे हैं। नई जगह पर ठिकाना बनाना इनके लिए बड़ी चुनौती बना है। बसने के लिए जमीन का आंवटन करीब 10 किलोमीटर दूर होना इनकी मुश्किलें बढ़ा रहा है। इससे किसी को खेती चौपट होने तो किसी को राशन न मिलने की चिंता सता रही है।
बाढ़ में बेघर होने वालों को सरकार की ओर से आवास बनाने के लिए जमीन का आंवटन किया जाता है। ऐसे ही कई कटान पीड़ित परिवारों को करीब 10 किलोमीटर दूर रायसेनपुर में भूमि आंवटित की गई है। दूरी का हवाला देकर सात पीड़ित परिवार वहां बसने नहीं जा रहे हैं। यह परिवार तटबंध पर झोपड़ी बनाकर अपना गुजर-बसर कर रहे हैं। बाबाकुटी निवासी शिवमंगल तथा राकेश का घर करीब तीन साल पहले कटान की भेंट चढ़ गया था। यह लोग प्यारेपुरवा के पास तटबंध पर झोपड़ी बनाकर रह रहे हैं।
राकेश ने बताया कि रायसेनपुर में आवास के लिए जमीन पट्टा मिला है, जो यहां से 10 किलोमीटर दूर है। वहां जाने में सबसे बड़ी समस्या राशन अनाज की आएगी। शंकरपुरवा के मुन्नू, देवरिया, अंगद तथा गुड्ड भी गोंदहा के पास तटबंध पर जीवन यापन कर रहे हैं। गुड्डू के पास एक बीघा खेत जबकि अंगद के पास आधा बीघा खेत है। गुड्डू बताते हैं कि इतनी दूर बसने चले गए तो खेती कैसे कर पाएंगे। उनका कहना है कि जीवन बिताने के लिए सिर्फ जमीन मिलना ही काफी नहीं है। नई जगह पर कई समस्याओं से भी जूझना पड़ेगा। सभी कटान पीड़ित आसपास के किसी गांव में ही जमीन आवंटित किए जाने की मांग शासन-प्रशासन से कर रहे हैं।
सरयू के जलस्तर में मामूली बढ़ोत्तरी
सरयू नदी का जलस्तर बुधवार को 117.25 मीटर पर पहुंच गया। तीन दिन से जलस्तर 117.20 मीटर पर स्थिर था। पानी में लगातार उतार-चढ़ाव तटवर्ती गांवों के लोगों की परेशानी कम नहीं होने दे रहा है। जिले में पिछले 24 घंटे के दौरान 19 मिलीमीटर बारिश हुई। वहीं, गिरिजापुरी बैराजों से 1.08 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। ग्रामीणों ने इससे सरयू के जलस्तर में बढ़ोतरी के साथ ही बाढ़ का खतरा बढ़ने की आशंका भी जताई है।