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पूजी गईं मां लक्ष्मी

Wed, 11 Nov 2015 06:07 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/सीतापुर
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हर ओर टिमटिमाते दीप। जगमग करती बिजली की रंग-बिरंगी झालरें। दीपोत्सव पर्व पर माहौल में रोशनी अपने साथ उमंग, उल्लास, उत्साह व खुशियां बिखेर रही थीं। घर के बड़े पूजा में तो बच्चे पटाखे फोड़ने में व्यस्त रहे।
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बुधवार को जिले में दीपों का त्योहार दिवाली परंपरागत तरीके से मनाया गया। बुधवार सांयकाल की बेला में शुभ मुहूर्त पर घरों, प्रतिष्ठानों व दफ्तरों में गणेश-लक्ष्मी और कुबेर की मूर्तियां पवित्र आसन पर प्रतिष्ठित कर श्रद्धापूर्वक विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया गया।

पूजन में पारंपरिक मिट्टी के दीपों को भी प्रज्ज्वलित किया गया। लोगों ने कनकधारा स्तोत्र व श्रीसूक्त का पाठ कर देवी लक्ष्मी की स्तुति कर सुख-समृद्धि व धन-वैभव की कामना की।
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दिवाली पर दिन भर लोग तैयारियों में लगे रहे। जबकि सांझ ढलने पर पूजा का दीप जलाने के बाद उसकी लौ से दीपों को जलाकर घरों में चारों ओर रखा गया। लोगों ने बिजली की झालरों से भी अपने आशियाने सजाए।

बच्चों ने अभिभावकों व छोटे लोगों ने अपने से बड़ों का आशीर्वाद लिया। जिसके बाद पटाखे छुड़ाने का दौर चल निकला। देर रात तक पटाखों की धूमधड़ाम व फुलझड़ियों-अनारों की रोशनी माहौल में घुलती रही।

अनार, महताब और फुलझड़ी की रोशनी ने अमावस्या की काली रात को रोशनी से जगमग कर दिया। हवा में उड़कर तेज आवाज कर रंग-बिरंगे सितारे छोड़ने के बाद गायब हो जाने वाले रॉकेट रह-रहकर फिजां में तैरते रहे। आसमान देर रात तक पटाखों की रोशनी से जगमग रहा। देर रात तक लोग दिवाली के जश्न में डूबे रहे।

दीपावली के मौके पर बाजारों में उमड़ी भीड़
रोशनी के त्यौहार पर बुधवार को शहरी और गंवई इलाके की बाजार गुलजार रहीं। दिवाली पर्व से जुड़ी छोटी-बड़ी सारी सामग्री खरीदने में लोग व्यस्त रहे। सुबह से ही बाजारों में चहल-पहल बढ़ गई।

खील-बताशे से लेकर पटाखा बाजारों में अच्छी खासी रौनक दिखी। लोगों ने गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियों के साथ ही पूजन सामग्री की खरीददारी की। बुधवार को जीआईसी मैदान में लगी पटाखा मार्केट देर शाम तक ग्राहकों से गुलजार रही।

लोगों ने दिल खोल कर आतिशबाजी खरीदी। इस बार लोगों ने रंग-बिरंगी रोशनी वाली फुलझड़ियां खरीदना ज्यादा पसंद किया। पटाखा विक्रेताओं की मानें तो इस बार आतिशबाजी के लिए रंग-बिरंगी रोशनी वाले आइटम पसंद बने।

आधुनिकता के इस युग में लोगों ने चाइनीज, गणेश लक्ष्मी की मूर्तियों, इलेक्ट्रॉनिक्स झालरों के अलावा स्वास्तिक  और शुभ-लाभ के प्रतीक खरीदे। देर शाम तक बाजार में गहमागहमी रही। महंगाई के बाद भी लोगों ने पारंपरिक सामग्री की खरीददारी की है।
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