सीतापुर। अपने भविष्य को स्वर्णिम बनाने के लिए अपनों से हजारों किमी. दूर गए जिले के होनहारों को जान के लाले पड़ गए हैं। यूक्रेन पर हमला किए जाने के बाद जिले के छात्र भी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। यूक्रेन में हो रहे बम धमाकों से जिले में रह रहे उनके मां-बाप का कलेजा कांप रहा है।
ऐसे में परिजन अपने जिगर के टुकड़ों की सलामती के लिए दुआएं कर रहे हैं। भारत और राज्य सरकार से मदद की दरकार कर रहे हैं। स्थानीय प्रशासन भी परिजनों को ढांढस बधाते हुए उनके लाडलों को सकुशल घर वापस लाने का दावा कर रहा है। जिन परिवारों में उनके लाडलों की वापसी हो गई है, वहां खुशियां छाईं है, वहीं कुछ छात्र यूक्रेन से निकल कर पड़ोसी देशों तक पहुंच गए हैं। जिससे उनके परिजनों ने राहत की सांस ली है, लेकिन कुछ छात्र ऐसे भी हैं, जो अभी तक कॉलेज के बंकरों में फंसे हुए हैं।
मेरी बस में तिरंगा लगा था, सेना ने नहीं रोका
महमूदाबाद तहसील के मुनीजर गंज निवासी रामलखन का पुत्र डेविड यूक्रेन के शहर युवानो में मेडिकल की पढ़ाई कर रहा था। हालत बिगड़ने पर डेविड वहां से निकल कर सक्रुशल घर वापस आ गया। उसके घर आ जाने पर परिवार में खुशियां छाई हैं। डेविड ने बताया कि यूक्रेन के हालत खराब होने पर उसे भारत सरकार ने मदद की। भारतीय दूतावास की तरफ से उनको अपने जरूरी कागजात और पैसे रखने के लिए जानकारी दी गई थी। एटीएम से पैसे भी नही निकल रहे थे, उसके पास मात्र 6 सौ ग्रेविन थे।
जिसमें से 5 सौ ग्रेविन खर्च करके वह बस से रोमानिया बार्डर तक पहुंचा। रास्ते में कई जगहों पर फोर्स चेक कर रही थी, लेकिन तिरंगा झंडा लगा होने से किसी ने बस को नहीं रोका। जिसके बाद वह सिरेटा से रोमानिया तक पैदल पहुंचे। वहां से उन्हें भारत के लोग बोखारेस्ट एयरपोर्ट ले गए। उनके साथ 220 छात्र वापस भारत आए। दिल्ली से उन्हें यूपी सरकार के लोग मिले और लखनऊ से उनके घर को छोड़ने आए। यह सब मोदी सरकार के चलते हुआ है। वरना हम घर नही पहुंच पाते। डेविड के साथ उसके माता पिता ने भी पीएम मोदी को धन्यवाद दिया है।
बिसवां का शादाब कीव से निकला अगले पड़ाव पर
बिसवां के बिसवां के ग्राम चंदनपुर निवासी दय्यान अख्तर का बेटा शादाब आलम भी यूक्रेन के शहर कीव में मेडिकल की पढ़ाई कर रहा था। हालत बिगड़ने पर वह भी भारतीय छात्रों के साथ वहां से देश आने के लिए निकल पड़ा है।
छात्र शादाब के चाचा हसीब अख्तर ने बताया कि मंगलवार को शादाब से बात हुई है, जिस पर उसने बताया कि अन्य छात्रों के साथ कीव से निकल कर विनसिया स्टेट पहुंच गया है। यहां से उसे लगभग 800 किमी. दूर हंगरी बार्डर जाना है। जहां से वह भारत के लिए निकल सकेगा। शदाब ने बताया कि यहां के हालत बहुत खराब हैं। बाहर माइनस 5 डिग्री तापमान है। जिसके चलते बाहर निकलने पर काफी परेशानी भी हो रही है। बिसवां तहसीलदार ने परिजनों और छात्र से बात ढांढस बधाया।
यूक्रेन में फंसी छात्रा तान्या हुई बीमार
तंबौर के रिहार निवासी पंकज पांडेय की बेटी तान्या पांडेय भी यूक्रेन में फंसी हुई है। पिता पंकज पांडेय ने बताया कि खाने के साथ ही पीने के पानी का अभाव होता जा रहा है। रविवार को तान्या को स्वच्छ पानी नहीं मिला। जिस पर तान्या ने खुला पानी पी लिया। दूषित पानी पीने से उसे तेज बुखार हो गया है। फोन पर बात हो रही है वह बंकर में सुरक्षित है, लेकिन वह काफी दहशत में है। भारतीय दूतावास ने वहां मौजूद छात्रों से निकल कर बार्डर पार करने को कहा है। भारत के दूतावास से मेल से संपर्क किया जा रहा है। बेटी के खाते में पैसे भी डाले हैं, लेकिन एटीएम तक पहुंच न होने से उसके पास पैसे भी नहीं हैं। पिता ने बताया कि दहशत में रह रही बेटी अब वीडियो कॉलिंग भी नहीं कर पा रही है।