सीतापुर। जिला अस्पताल में सोमवार को मरीजों को इलाज के लिए जूझना पड़ा। अस्पताल में पैर रखने भर की जगह नहीं थी। अस्पताल गेट से लेकर पर्चा काउंटर, दवा काउंटर व पैथालॉजी में भीड़ ही भीड़ थी। हर तरफ पर्चा जमा करने की मारामारी मची थी। हालात इतने खराब थे कि कई मरीज लाइनों में लग नहीं पा रहे थे, इससे वह भीड़ कम होने का इंतजार में जमीन पर ही लेटे रहे। केवल ओपीडी में ही 2762 मरीजों ने इलाज करवाया। दो बजे तक अस्पताल परिसर में मारामारी मची रही।
अमर उजाला टीम ने सोमवार को जिला अस्तपाल में सुविधाओं की रियलटी परखी। इसमें हर तरफ अव्यवस्था ही दिखाई दी। सुबह 9.30 बजे पर्चा काउंटर से अस्पताल के मुख्य गेट तक महिला व पुरुषों की लंबी लाइनें लगी थी। लाइन में लगे मुकेश ने बताया, सुबह 8.30 बजे अस्पताल आ गया था। उस समय काउंटर चालू भी नहीं हो पाया था। अभी तक पर्चा नहीं बन सका है।
रेहाना ने बताया, पेट में काफी दर्द हो रही है। भीड़ इतनी अधिक है कि काउंटर तक पहुंचने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। पेट में दर्द अधिक हो रहा है, फिर भी लाइन में लगना मजबूरी है। 11 बजे दवा काउंटर पर दर्द से कराह रहे अदिति ने बताया, अस्पताल प्रशासन को दवा काउंटरों की संख्या बढ़ानी चाहिए। काफी देर से लाइन में खड़ा हूं, अभी तक दवा नहीं मिल सकी है।
कुछ ऐसे ही हालात ओपीडी में बैठे चिकित्सकों के सामने भी रहे। मरीज जल्दबाजी के चक्कर में कोविड प्रोटोकॉल को भूलकर लाइन में लग रहे। यहां पर भी दो बजे तक लाइन लगी रही। इसके कारण अस्पताल आए मरीजों को हर कदम पर दुश्वारियां झेलनी पड़ी। मरीजों की भीड़ अधिक हो रही है तो उन्हे भर्ती कराने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बेड की किल्लत के चलते चिकित्सकों ने बहुत गंभीर मरीजों को ही भर्ती किया।
पैथालॉजी में मची रही मारामारी
पैथालॉजी में भी जांच के नाम पर मारामारी मची रही। यहां पर जब मरीज चिकित्सकों को दिखाकर सैंपल देने पहुंचे तो पहले उन्हें पर्चा जमा करने के लिए लाइनों में लगना पड़ा। उसके बाद करीब एक घंटे बाद उनका सैंपल लिया जा सका। हर्ष रस्तोगी ने बताया, सुबह 10 बजे से सैंपल के लिए लाइन में खड़ा हूं। 11 बजे हैं। अभी तक सैंपल नहीं हो पाया है। रिपोर्ट लेकर डॉक्टरों को दिखाना बहुत ही मुश्किल लग रहा है। यहां पर डेढ़ बजे के बाद जब रिपोर्ट का वितरण हुआ तो भी आपाधापी मची रही।
चमका फ्लैश तो टंगा बोर्ड
सुबह 10 बजे अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर मरीज चिकित्सक के आने का इंतजार कर रहे थे। वह बेसब्री से कमरे के अंदर से मरीज के नाम पुकारने की आस लगाए थे। कनवाखेड़ा के लल्लू राम जमीन पर बैठकर इंतजार कर रहे थे। इससे यहां पर मरीजों की लंबी लाइनें लगी थी। लेकिन कोई भी जिम्मेदार मरीजों को सही जवाब नहीं दे रहा था। जब मरीज की तरफ कैमरे का फ्लैश चमका तो कर्मचारी ने चिकित्सक कोर्ट गए है, का बोर्ड टांग दिया। इससे तमाम मरीज बिना अल्ट्रासाउंड कराए लौट गए। सिधौली के भंडिया से आए रामनाथ भी इंतजार में बैठे रहे।
पैरों में दर्द, लाइन में खड़े होना मुश्किल
कटीली से शुभम की दवा लेने आई उनकी दादी भीड़ अधिक होने की वजह से लाइन में कुछ देर तक लगी रही। लेकिन लाइन लंबी होने की वजह से वह पैरों का दर्द सहन नहीं कर सकी। इससे वह पर्चा काउंटर के पास चबूतरे पर ही बैठ गई। बोली, भैया यहां पर बहुत लंबी लाइन है, जब लाइन कम हो जाएगी। उसके बाद ही दवा लूंगी। तब तक शुभम (5) वहीं पर खेलता रहा।
एक बच्चे की मौत, तीन भर्ती
जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में कांशीराम कॉलोनी खैराबाद निवासी नगीना (7) की बुखार के चलते मौत हो गई है। परिजनों ने बताया, नगीना का कई दिनों से इलाज चल हिा था। तीन बच्चे बुखार के चलते चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती कराए गए है। इन बच्चों के इलाज के बाद इनकी हालत में काफी सुधार हुआ है।
सोमवार को ओपीडी में काफी अधिक भीड़ थी। इस समय वायरल के अधिक मरीज आ रहे है। फिर भी सभी मरीजों को इलाज दिया जा रहा है।
- डॉ. अनिल अग्रवाल, सीएमएस