सीतापुर। जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और शिशु एवं मातृ मृत्यु दर को कम करने के लिए डीएम ने विशेष पहल की है। यहां प्रत्येक 1000 गर्भवती महिलाओं में से 46 में खून की कमी (एनीमिया) पाई जाती है। एनीमिया से ग्रसित होने के कारण प्रसव के दौरान तमाम महिलाओं की मौत हो जाती है।
सीतापुर में मातृ मृत्यु दर की बात करें तो एक लाख गर्भवती महिलाओं में से 166 की प्रसव के दौरान मौत हो जाती है। वहीं, शिशु मृत्यु दर में 1000 बच्चों में से 46 की प्रसव के बाद मौत हो जाती है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, गर्भवती महिलाओं में खून की कमी अक्सर गर्भधारण के बाद आती है, जो प्रसव के दौरान जानलेवा साबित होती है। इस समस्या को दूर करने के लिए जिलाधिकारी ने एएनएम की जिम्मेदारी बढ़ा दी है। एएनएम अब हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं की पहचान करेंगी। इन महिलाओं का डाटा ऑनलाइन किया जाएगा। सीएचसी में बने मातृ सुरक्षा केंद्र के माध्यम से इनकी निरंतर निगरानी की जाएगी। इन महिलाओं को जिला महिला अस्पताल के चिकित्सकों से भी परामर्श दिलाया जाएगा, साथ ही संस्थागत और सुरक्षित प्रसव के लिए जागरूक किया जाएगा।
माह में चार दिन होती है जांच
गर्भवती महिलाओं के लिए प्रत्येक माह सुरक्षित मातृत्व दिवस मनाया जाता है। यह दिवस माह की एक, नौ, 17 और 24 तारीख को आयोजित होता है। इस दिन आशा कार्यकर्ता गर्भवती महिलाओं को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) तक लाती हैं। वहां उनकी खून, पेशाब, अल्ट्रासाउंड और थायरॉइड जैसी जांच करवाई जाती हैं। रिपोर्ट के आधार पर उन्हें उचित इलाज और परामर्श दिया जाता है। इसके अतिरिक्त ग्राम स्तर पर ग्राम स्वास्थ्य एवं स्वच्छता दिवस का आयोजन होता है। इस दिन एएनएम गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण करके प्राथमिक जांच भी करती हैं।
नियमित करवाएं जांच
जिला महिला अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. सुनीता ने बताया कि अस्पताल आने वाली अधिकतर गर्भवती महिलाओं में खून की कमी होती है। इसके लिए महिलाओं को आयरन की गोलियां दी जाती हैं और जरूरत पड़ने पर आयरन सुक्रोज का इंजेक्शन भी लगाया जाता है। गर्भधारण के बाद से महिलाओं को हरी सब्जियां खाना और खानपान का विशेष ध्यान देना चाहिए। साथ ही नियमित जांच करवाने से खून की कमी आसानी से दूर की जा सकती है।
हो रही है निगरानी
गर्भवती महिलाओं की मातृ सुरक्षा केंद्र के माध्यम से निगरानी की जा रही है। फोन करके उनका हालचाल लिया जा रहा है। सुरक्षित प्रसव कराने की जिम्मेदारी एएनएम को दी गई है।
डॉ. सुरेश कुमार, सीएमओ