सीतापुर। अमर उजाला की मुहिम अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स व वोडाफोन सखी के तहत दि हिंद इंटरनेशनल स्कूल में आयोजित सेल्फ डिफेंस कार्यशाला में छात्राओं ने बेबाक तरीके से अपनी राय रखी। छात्राओं ने कहा कि इससे बेटियां और महिलाएं संकट के वक्त में अपनी सुरक्षा खुद कर सकती है।
उन्होंने कहा कि पहले महिलाएं अपने घरों से बाहर निकल नहीं पाती थीं, लेकिन अब इसमें बदलाव आया है। शिक्षा से महिलाओं में निश्चित तौर पर जागरूकता बढ़ी है। यही नहीं हर क्षेत्र में महिलाओं ने अपनी सफलता के झंडे भी गाड़े हैं, लेकिन अभी भी तमाम महिलाओं में इच्छा शक्ति की कमी है। जिसके बलबूते वह सफलता के नए मापदंड स्थापित कर सकती हैं। इसलिए वे मजबूत हौसलों के साथ आगे बढ़ें।
आत्मनिर्भर बनें
महिलाओं व बेटियों को ताइक्वांडो सीखना चाहिए। इससे इनमें आत्मनिर्भरता आती है। मुसीबत के समय वे डटकर सामना भी कर सकती है।
सुरभि, छात्रा
पढ़ाई में लगता मन
खेल से शारीरिक और मानसिक विकास होता हैं। मस्तिष्क स्वस्थ रहने से पढ़ाई में भी मन लगता है। सही फैसले लेने की क्षमता बढ़ती है।
अनुषा, छात्रा
आत्मरक्षा के सीखें गुर
बेटियों व महिलाओं को आत्म सुरक्षा के तरीके सीखने चाहिए, ताकि वह स्वयं अपनी रक्षा कर सकें। दूसरे को भी ताइक्वांडो सीखने के लिए प्रेरित करना चाहिए। - दामिनी, छात्रा
खेलों से आता अनुशासन
खेलों से मानव में अनुशासन आता है। साथ ही शारीरिक और मानसिक दोनों का विकास होता है। इसलिए छात्राओं को ताइक्वांडो अवश्य सीखना चाहिए।
अनुष्का, छात्रा
दूसरों को दें प्रेरणा
हमें आत्मरक्षा के लिए ताइक्वांडो सीखना चाहिए। साथ ही आसपास के लोगों को भी इसे सीखने के लिए प्रेरणा देनी चाहिए।
पूजा, छात्रा
अभ्यास से आता निखार
निरंतर अभ्यास से निखार आता है। इसलिए नियमित ताइक्वांडो का अभ्यास करना चाहिए। मुसीबत के वक्त में वह आसानी से इसका प्रयोग कर सकती हैं।
सारिका, छात्रा
ताइक्वांडो सीखना जरूरी
महिलाओं और बेटियों को ताइक्वांडो जरूर सीखना चाहिए। इससे समाज के अंदर बढ़ते अपराध से बालिकाएं व महिलाएं आसानी से निपट सकती हैं।
मुकेश पाल, ताइक्वांडो प्रशिक्षक
बढ़ा आत्मविश्वास
महिलाएं कमजोर नहीं हैं। पहले महिलाएं घरों से निकलने में डरती थीं, लेकिन अब आत्म विश्वास बढ़ने से वह निडर आ जा सकती हैं।
कल्पना,
मजबूत हुईं महिलाएं
कोई भी अब महिलाओं को कमजोर न आंके। वह कमजोर नहीं रही हैं। शिक्षा से उनमें जागरूकता आई है और लगातार ताकतवर बन कर उभरी भी हैं।
संजू सिंह
खुद को बदले समाज
समाज को अपने नजरिए में बदलाव लाना चाहिए। उन्हें चाहिए कि वह महिलाओं की मदद करें और उन्हें आगे बढ़ाने में मदद भी करें।
सीमा दुबे, प्रधानाचार्या
लक्ष्य को करें हासिल
बेटियां किसी से डरें नहीं। वह अब कमजोर नहीं हैं। शिक्षा से महिलाओं में जागरूकता आई है। आत्मविश्वास के बल पर कोई भी लक्ष्य हासिल कर सकती हैं।
शिव शरण मिश्रा