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निजी और सरकारी सस्ते गल्ले की बोरियों में होगी गेहूं खरीद

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निजी और सरकारी सस्ते गल्ले की बोरियों में होगी खरीद
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गेहूं खरीद : केंद्रों पर बोरियों की किल्लत दूर करने को सरकार के निर्देश
18 लाख बोरियों की है जरूरत, 41300 बोरियां ही हैं उपलब्ध
परमात्मा शुक्ला
सिद्धार्थनगर। गेहूं खरीद केंद्रों पर अब सरकारी सस्ते गल्ले की बोरियां और निजी बोरियों में भी गेहूं खरीद होगी। बोरियों की कमी को देखते हुए ऐसा निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है। जनपद में गेहूं खरीद के लिए जहां 18 लाख बोरियों की जरूरत है। वहीं, फिलहाल मात्र 41 हजार बोरियां ही उपलब्ध हैं। दरअसल लॉकडाउन में जूट फैक्ट्रियां बंद हैं लिहाजा बोरियों का उत्पादन ठप है।
सरकार ने जिले में 88.5 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया है। गेहूं खरीद के लिए जिले में विभिन्न विभागों के 108 गेहूं क्रय केंद्र बनाए गए हैं। इनमें 105 गेहूं क्रय केंद्रों पर गेहूं खरीद शुरू करते हुए अब तक किसानों से 8402 एमटी गेहूं खरीद की गई है। गेहूं खरीद के लिए निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष जिले में 18 लाख बोरियों की जरूरत है। जबकि 41,300 बोरियां ही यहां उपलब्ध हैं। कई क्रय केंद्रों पर बोरी की कमी होने के कारण गेहूं खरीद भी प्रभावित हुई है। डिप्टी आरएमओ संजय कुमार पांडेय ने कहा कि गेहूं खरीद के लिए अभी बोरियां तो हैं, लेकिन लॉकडाउन होने के कारण सप्लाई बंद होने से आगे खरीद के लिए बोरियों की दिक्कत हो सकती है। इसको देखते हुए केंद्र सरकार की तरफ से कोटे की दुकानों की बोरियों और बिना कटी-फटी एवं साफ-सुथरी निजी बोरियों मेें भी गेहूं खरीद करने का आदेश जारी किया गया है।
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बंद है बोरियों का उत्पादन, आपूर्ति
कोरोना वायरस आपदा में लॉकडाउन के कारण कोलकाता समेत देश एवं प्रदेश के विभिन्न स्थानों जूट और प्लास्टिक फैक्ट्रियां बंद होने से बोरियों के उत्पादन के साथ ही इसकी आपूर्ति भी ठप है। साथ ही वाहनों के आवागमन बाधित होने से जिला समेत पूरे प्रदेश में गेहूं खरीद के लिए बोरियों की किल्लत हो गई है।
खुले बाजार में गेहूं बेच रहे किसान
वर्तमान में खुले बाजार में गेहूं की कीमत में उछाल होने से भी गेहूं क्रय केंद्रों पर किसान गेहूं बिक्री करने से कतरा रहे हैं। सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं बिक्री करने में आने वाली दिक्कतों को देखते हुए लोग खुले बाजार में गेहूं बिक्री कर रहे हैं। खुले बाजार में गेहूं की रेट 1800 रुपये प्रति क्विंटल है।
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आपदा में गेहूं बिक्री से भी कर रहे परहेज
कोरोना वायरस आपदा में लॉकडाउन होने और इसके बढ़ने की संभावना को देखते हुए किसान गेहूं बिक्री करने भी परहेज कर रहे हैं। किसान मणिकांत तिवारी का कहना है कि वर्तमान आपदा में गेहूं बिक्री करना उचित नहीं दिख रहा। इसके अलावा बाद में गेहूं के मूल्य में बढ़ोत्तरी की संभावना को देखते हुए भी लोग वर्तमान में गेहूं बिक्री नहीं करना चाह रहे हैं।
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