बदलेगी ग्रामीण सड़कों की सूरत, 254 करोड़ से होंगे दुरूस्त
- तीन सौ किमी लंबे 40 सड़कों का चौड़ीकरण एवं उच्चीकरण होगा
- प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के ग्रामीण अभियंत्रण विभाग करेगा कार्य
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों की हालत में सुधार होने की उम्मीद बढ़ गई है। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत 254 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न क्षेत्रों की 40 सड़कों के चौड़ीकरण एवं उच्चीकरण कार्य की स्वीकृति मिली है। इनमें कुछ सड़कों पर निर्माण शुरू हो गया है और कुछ सड़कों का निर्माण जल्द शुरू हो जाएगा। इससे जिले की 650 गांव के लोगों को आवागमन की सुविधा होगी।
प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत जिले के खेसरहा, बांसी, जोगिया, इटवा, शोहरतगढ़, बर्डपुर, डुमरियागंज, बढ़नी व लोटन आदि क्षेत्र की क्षतिग्रस्त हो चुकी 40 ग्रामीण सड़कों के चौड़ीकरण एवं उच्चीकरण की स्वीकृति मिली है। इनमें कई सड़कें ऐसी है जिन पर बने गड्ढों के कारण हालत बदतर है, जिनसे संबंधित क्षेत्र के सैंकडों गांव के लोगों का प्रतिदिन आवागमन होता है। ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अधिशासी अभियंता आरएन सोनकर का कहना है कि जिले में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत 40 सड़कों के निर्माण की स्वीकृति मिली है। जल्द ही इनका निर्माण शुरू करा दिया जाएगा।
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इन सड़कों को मिली है स्वीकृति
प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत खेसरहा क्षेत्र के सकारपार से धर्मसिंहवा तक और सकारपार से चोरईताल तक जाने वाली सड़क एवं जोगिया ब्लॉक क्षेत्र के पेड़ारी से तालनटवा तक जाने वाली सड़क चयनित किया गया है। इसके अलावा उसका क्षेत्र में एनएच 730 से महुलानी होते हुए सियरापार तक जाने वाली सड़क भी प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना से बनाया जाएगा। अधिशासी अभियंता आरएन सोनकर का कहना है कि सड़कों के निर्माण में अनियमिता पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जिले में बदतर हैं सड़कों की हालत
अधिवक्ता कृपाशंकर त्रिपाठी कहते हैं कि जब जिले में गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग की हालत बदतर हो तो ग्रामीण सड़कों की दशा पर बात करना बेमानी साबित होगा। नौगढ़, बांसी, शोहरतगढ़, डुमरियागंज व इटवा क्षेत्र की कई ग्रामीण सड़कें ऐसी हैं जिस पर गुजरना मुश्किल होता है। कहीं-कहीं तो सड़क पूरी तरह गड्ढे में बदल गए हैं। इन सड़कों की दशा में सुधार के लिए स्थानीय लोग विभागीय अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों से कई बार गुहार लगाए, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली।