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हैसियत प्रमाणपत्र की वैधता हुई तीन वर्ष

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हैसियत प्रमाणपत्र की वैधता हुई तीन वर्ष
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शासन ने बढ़ाई वैधता अवधि, पहले दो वर्ष थी समयसीमा
राजस्व अनुभाग के अपर मुख्य सचिव ने डीएम को भेजा पत्र
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। शासन ने राजस्व विभाग से बनने वाले हैसियत प्रमाणपत्र की अवधि दो वर्ष से बढ़ाकर तीन वर्ष कर दी है। इससे विभिन्न विभागों में निर्माण आदि कार्य करने वाले ठेकेदारों और नीलामी लेने वालों को राहत मिलेगी। अब तक हैसियत प्रमाणपत्र की वैधता अवधि दो वर्ष ही निर्धारित थी। राजस्व विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने डीएम को भेजे पत्र में नए नियमों के अनुसार हैसियत प्रमाणपत्र जारी करने के निर्देश दिए हैं।
जिला पंचायत, पीडब्ल्यूडी, सिंचाई समेत विभिन्न विभागों में ठेकेदारी करने को विभाग में पंजीकरण के लिए लोगों को राजस्व विभाग से जारी हैसियत प्रमाणपत्र लगाना पड़ता है। साथ ही शराब की दुकानों आदि की नीलामी में भाग लेने वालों को भी हैसियत प्रमाणपत्र बनवाना पड़ता है। निर्धारित वैधता अवधि तक ही इसका उपयोग किया जा सकता है। आठ वर्ष पूर्व हैसियत प्रमाणपत्र की वैधता अवधि तीन वर्ष थी, जो बाद में घटाकर दो वर्ष कर दी गई थी। वैधता की अवधि समाप्त होने पर ठेकेदारों एवं नीलामी लेने वालों को तहसील का चक्कर लगाना पड़ता है। ठेकेदारी करने वाले राजमन, दीनानाथ का कहना है कि दो वर्ष में हैसियत प्रमाणपत्र की अवधि समाप्त होने से दोबारा तहसील एवं कलेक्ट्रेट का चक्कर लगाना पड़ता है। अब वैधता अवधि तीन वर्ष होने से राहत मिलेगी। राजस्व विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने 28 मार्च को प्रदेश के सभी डीएम को भेजे पत्र में नए नियमों के तहत तीन वर्ष वैधता अवधि के हैसियत प्रमाणपत्र जारी करने के निर्देश दिए हैं।
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दो माह काटना पड़ता है चक्कर
राजस्व विभाग से हैसियत प्रमाणपत्र बनवाने के लिए लोगों को तहसील एवं कलेक्ट्रेट का दो माह तक चक्कर काटना पड़ता है। आवेदन के बाद लेखपाल, अमीन व कानूनगो समेत अन्य अधिकारियों की रिपोर्ट लगने के बाद डीएम की तरफ से हैसियत प्रमाणपत्र जारी किया जाता है।
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