परीक्षा परिणाम में देरी से असमंजस में छात्र-छात्राएं
- माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से अब तक नहीं जारी किया गया परिणाम
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर/बिस्कोहर। माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से कराए गए बोर्ड परीक्षा का परिणाम जारी न होने से छात्र-छात्राओं ने असमंजस बना हुआ है। अन्य शिक्षण संस्थानों में जाकर शिक्षा ग्रहण करने की उम्मीद पाले बच्चों को भविष्य की चिंता सातने लगी है।
यूपी बोर्ड की परीक्षा में जिले के 52 हजार 85 परीक्षार्थी शामिल हुए थे, इसमें हाईस्कूल परीक्षा में 30 हजार 836 परीक्षार्थी और इंटरमीडिएट परीक्षा में 21 हजार 249 परीक्षार्थी शामिल हुए थे। परीक्षा के बाद मई माह के आखिरी सप्ताह में परीक्षा परिणाम आने की उम्मीद बच्चों ने लगाई थी, लेकिन जून का एक पखवारा बीतने वाला है। अब तक परीक्षाफल नहीं आया है। इससे परीक्षार्थी असमंजस में पड़े हुए हैं, लेकिन अब तक शिक्षा विभाग द्वारा कोई भी अधिकृत तारीख की घोषणा नहीं की गई है।
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पहली बार बोर्ड परीक्षा में भाग लेने के बाद परिणाम के लिए काफी उत्साहित हूं। परीक्षा समय से होने के बाद भी यूपी बोर्ड के द्वारा अब तक परिणाम के संबंध में किसी निश्चित तिथि की घोषणा नहीं की गई है। 15 जून से नए सत्र की कक्षाएं प्रारंभ हो रही हैं, अंकपत्र के अभाव में प्रवेश व पढ़ाई दोनों ही अधर में है।
- हाजरा खातून, छात्रा हाईस्कूल
बोर्ड परीक्षा होने के बाद हमारे जैसे सभी छात्रों में परिणाम को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। यूपी बोर्ड के नए नियमानुसार प्रत्येक विद्यार्थियों का ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर विद्यालय के द्वारा दोबारा बोर्ड को उपलब्ध कराया गया है। ताकि लोगों को परिणाम प्राप्त करने में कोई दिक्कत ना हो परंतु ज्यादा विलंब होने के कारण विद्यालय और विषयों के चुनाव को लेकर समस्या जटिल होती जा रही है।
- आदर्श चौधरी, छात्र हाईस्कूल
मेडिकल के क्षेत्र में आगे बढना चाहती हूं। 15 जून से सभी कॉलेजों में नया सत्र प्रारंभ हो रहा है। लेकिन अंकपत्र के अभाव में प्रवेश अभी तक रुका हुआ है। परिणाम में विलंब होने की वजह से उससे संबंधित अन्य दस्तावेज भी विलंब से प्राप्त होंगे। जिसके लिए हम जैसे विद्यार्थियों को विद्यालय का चक्कर लगाना पड़ेगा।
- शैलजा त्रिपाठी, छात्रा इंटरमीडिएट
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अच्छे कॉलेज से बीएससी करना चाहता हूं। लेकिन यूपी बोर्ड के द्वारा न तो अब तक परिणाम जारी किया गया और न ही कोई निश्चित तिथि कि सूचना ही की गई है। ऐसे में अन्य जनपदों के अच्छे कॉलेजों में प्रवेश लेने का सपना अधर में है।
- संदीप विश्वकर्मा, छात्र इंटरमीडियट