सिद्धार्थनगर। प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने रविवार को नगर में संचालित दो अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर छापा मारा। जांच में केंद्रों पर व्यापक पैमाने पर गड़बड़ी मिली। किसी भी केंद्र पर न तो रेडियालॉजिस्ट था और न ही कोई प्रशिक्षित कर्मी। आवश्यक दस्तावेज भी नदारद थे। टीम के पहुंचते ही मरीजों का अल्ट्रासाउंड कर रहे कर्मचारी भाग गए। छानबीन के बाद टीम ने मौजूद रिकॉर्ड जब्त करते हुए दोनों केंद्रों को सील कर दिया।
लखनऊ से आई स्वास्थ्य विभाग की तीन सदस्यीय टीम सदर एसडीएम डॉ. महेंद्र कुमार के नेतृत्व में दोपहर बाद दो बजे हुसैनगंज स्थित राज डायग्नोस्टिक सेंटर पहुंची। टीम ने दस्तावेज मांगे तो मौजूद कर्मचारी टाल-मटोल करने लगे। रेडियोलॉजिस्ट के बारे में पूछा तो बताया गया कि कहीं बाहर निकले हैं, जबकि कंप्यूटर में दर्ज आंकड़ों के अनुसार वहां लगातार अल्ट्रासाउंड का कार्य जारी था। केंद्र पर लगे अल्ट्रासाउंड मशीन का नंबर व मॉडल भी स्वास्थ्य विभाग में पंजीकृत नंबर-मॉडल से मैच नहीं कर रहा था। केंद्र पर पीएनडीटी एक्ट के मानकों के अनुरूप कोई रजिस्टर भी नहीं मिला। मरीजों को दिया जाने वाला रिपोर्ट कार्ड भी तय फार्मेट में नहीं था। छापेमारी के दौरान कर्मचारी मौके से फरार हो गए। टीम ने रजिस्टर व अन्य कागजात जब्त कर केंद्र को सील कर दिया।
इसके बाद टीम वन विभाग कॉलोनी मोड़ स्थित सिद्धार्थ अल्ट्रासाउंड सेंटर पहुंची। यहां भी कोई रेडियोलॉजिस्ट नहीं मिला। मरीजों ने बताया कि एक युवक ही मशीन से जांच कर रिपोर्ट दे रहा है। टीम ने उसे पकड़ना चाहा, लेकिन वह चकमा देकर फरार हो गया। इस केंद्र पर भी कोई वैध दस्तावेज नहीं मिले। टीम ने इस सेंटर को भी सील कर दिया।
सूचना के बाद प्रभारी सीएमओ डॉ. विजय कुमार भी मौके पर पहुंचे। एसडीएम डॉ. महेंद्र कुमार ने बताया कि डीएम के निर्देश पर छापेमारी की गई। जांच में दोनों केंद्रों पर व्यापक गड़बड़ियां मिली हैं। केंद्र बिना किसी रेडियोलॉजिस्ट के ही संचालित हो रहे थे। किसी भी डॉक्टर का नाम भी अंकित नहीं था। रजिस्टर सहित अन्य दस्तावेज जब्त करते हुए दोनों केंद्रों को सील कर दिया गया है। टीम में शोहरतगढ़ तहसीलदार नंदप्रकाश मौर्य भी शामिल रहे। उधर, प्रभारी सीएमओ डॉ. विजय कुमार का कहना था कि विभागीय टीम लखनऊ से आई थी। सीधे प्रशासन से संपर्क किया। लिहाजा उनके नाम व पद के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।