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रिश्तों की पटरी पर ट्रेन चलने का इंतजार

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रिश्तों की पटरी पर ट्रेन चलने का इंतजार
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नेपाल के जनकपुर पर पहुंची है ट्रेन, चलने का इंतजार
ट्रेन का संचालन शुरू होता तो सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों को भी मिलती सहूलियत
संवाद न्यूज एजेंसी
परसा। नेपाल के जनकपुर स्टेशन पर एक वर्ष पूर्व 18 सितंबर को जब दो ट्रेन पहुंचीं तो नेपाल में लोगों को लगा कि नये युग की शुरुआत होने जा रही है। मगर एक वर्ष बाद भी भारत से खरीदी गईं दोनों ट्रेनों के संचालन न होने से नेपाल के लोगों को निराशा के अलावा कुछ नहीं मिला। अगर ट्रेन चलती तो सीमावर्ती क्षेत्र के यात्रियों को भी जनकपुर जाने में सहूलियत मिलती।
नेपाल में रेलवे उन कई चीजों में से एक है, जो सरकारों द्वारा वादा किया गया है। वर्ष 2018 में केपी शर्मा ओली के सत्ता में आने के बाद नेपाल को अपने दोनों निकटतम पड़ोसियों भारत और चीन से रेलगाड़ियों से जोड़ना आम बात थी। पिछले साल जब ट्रेन आई तो ओली सरकार ने इसे अपनी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया। मगर नागरिकों के मुताबिक जब ये दोनों ट्रेनों की खरीद हुई और ये दोनों नेपाल लाई गईं तो सूचना मिली कि एक बार में 1000 यात्री बैठे और खड़े हो सकते हैं। 110 किमी प्रति घंटे की अधिकतम गति वाली ट्रेन को 84.65 करोड़ रुपये में खरीदा गया था। मगर ट्रेन का संचालन कुछ कारणों से नहीं हो सका। लोगों की आस और उम्मीद अब टूटने लगी है।
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बीते पांच मई को सरकार ने रेलवे संचालन पर एक अध्यादेश पेश किया। लेकिन 21 मई को ओली ने दूसरी बार सदन को भंग कर दिया। जिससे देश फिर से अनिश्चितता में आ गया। लगभग दो माह बाद 12 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने न केवल सदन को बहाल किया। बल्कि ओली को पद से हटा दिया और शेर बहादुर देउबा को नए प्रधान मंत्री के रूप में नियुक्त करने का आदेश दिया। अपनी नियुक्ति के दो महीने बाद भी देउबा अपने मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं कर पाए हैं। भौतिक अवसंरचना और परिवहन मंत्रालय में कोई समर्पित मंत्री नहीं है, जो रेल विभाग की देखरेख करता। भौतिक अवसंरचना और परिवहन मंत्रालय के संयुक्त सचिव केशव कुमार शर्मा ने कहा कि रेलवे सर्वोपरि है। इसलिए हमने इस परियोजना को उच्च प्राथमिकता दी है। इधर, देउबा सरकार ने 18 जुलाई को संसद के समक्ष रेलवे संचालन पर अध्यादेश पेश किया। अध्यादेश अब अमान्य हो गया है, क्योंकि इसे पेश किए जाने के 60 दिनों के भीतर संसद की मंजूरी नहीं मिली थी। समय सीमा 16 सितंबर को समाप्त हो गई।
18 जुलाई को पहली बार हुआ था ट्रेन का ट्रायल
माता सीता की जन्मस्थली जनकपुर को रेलमार्ग से जोड़ने के लिए रविवार को नेपाल के जनकपुर और बिहार के जयनगर रेल ट्रैक पर पहली बार ट्रेन दौड़ी। रामायण सर्किट के रूप में संचालित किए जाने वाले जयनगर-जनकपुर रेलखंड पर भारतीय ट्रेन से ट्रायल किया गया। बिहार के पश्चिमी चंपारण के सीमावर्ती रेलवे स्टेशन जयनगर से नेपाल के धनुषा, कुर्था तक 34 किलोमीटर के रेल खंड पर भारतीय रेल लाकर ट्रैक का परीक्षण किया गया। इस दौरान 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन दौड़ी।
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जनकपुर के लोगों को है रेलवे से बहुत उम्मीदें
जनकपुर के रहने वाले लोगों को उम्मीद है कि रेलवे सेवाओं के संचालन से व्यावसायिक गतिविधियों में वृद्धि होगी। अंतत: रेलवे के संचालन से शहर को जीवंत बना दिया जाएगा। जनकपुर के लिए रेलवे सेवा बहुत मायने रखती है। यह न केवल यात्रा को आसान, सुविधाजनक और सस्ता बनाएगा। बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देगा। हमें उम्मीद है कि ट्रेनें जल्द ही चलना शुरू कर देंगी। हमें उम्मीद है कि हमारा शहर इंजन की सीटी के साथ जीवंत हो जाएगा।
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