माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में ठंड लगने के बाद एकाएक बढ़ी गई रोगियों की संख्या
प्रतिदिन गले की समस्या वाले 15-20 मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। ठंड का मौसम शुरू होने के साथ ही मौसमी बीमारी लोगों के पर हावी होने लगी है। मौजूदा समय में गले में दर्द और आवाज कम निकलने के रोगियों की संख्या बढ़ी है। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन 15-20 रोगी पहुंच रहे हैं। चिकित्सक इसे मौसम का असर बता रहे हैं। मरीजों को दवा और बचाव के बारे में बता रहे हैं।
मौसम के बदलाव होने के बाद कई प्रकार की बीमारी शुरू होती है। ठंड शुरू होने के बाद शरीर का संतुलन अभी अनुकूल न होने के कारण सर्दी, बुखार सहित कई प्रकार की समस्या हो रही है। इसमें बच्चों के साथ हर उम्र के लोग चपेट में आ रहे हैं। इसमें गले में तेज दर्द और बोलने में तकलीफ होने वाले मरीज एकाएक बढ़े हैं। मरीजों को बोलने में कठिनाई होने के साथ ही असहनीय दर्द हो रहा है। इससे किसी की आवाज मोटी तो किसी की पतली भी हो जा रही है। इस प्रकार के मरीज एक या दो नहीं, बल्कि हर दिन 15-20 पहुंच जा रहे हैं।
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के नाक, कान और गला रोग विशेषज्ञ चिकित्सक के पास पहुंचे जोगिया निवासी सुनील को बोलने में कठिनाई हो रही थी। उन्होंने चिकित्सक से बताया कि रात में सोए और गले में खराश महसूस हुई। सुबह जब उठे तो दर्द शुरू हो गया। बोलने और पानी की घूंट अंदर जाने पर तेज दर्द कर रहा है। आवाज भी मोटी हो गई है।
वहीं, नगर निवासी अजहर को भी यह शिकायत थी। वह तो सही से बोल भी नहीं पा रहे थे। चिकित्सक ने गुनगुना पानी से गरारा करने और पानी को गुनगुना करके पीने की सलाह देते हुए एक सप्ताह की दवा दी। साथ ही ठंड से बचाव करने का सलाह दिया।
ये करें बचाव, नहीं होगी परेशानी
मौसम में बदलाव के बाद कोल्डडि्रंक न पीएं, फ्रीज का पानी न पीएं, आइस्क्रीम सहित कोई भी ठंडे खाद्य पदार्थ का प्रयोग न करें। क्योंकि यह गले में जकड़न पैदा कर देता है। जुकाम के साथ होने वाली जकडऩ से तेज दर्द और गले में खिंचाव और जख्म जैसा महसूस होता है। ऐसी समस्या होने पर तत्काल चिकित्सक की सलाह पर दवा लें। गुनगुना पानी से गरारा करें और पानी को गुनगुना करके पीएं। इससे काफी राहत मिलेगी।
-डॉ. संजय कुमार शर्मा, नाक, कान गला रोग विशेषज्ञ