- माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में बन रहा 42 बेड का पीकू वार्ड
- दिमागी बुखार व अन्य बीमारी के शिकार बच्चों के इलाज में मिलेगी सहूलियत
- पहले 15 बेड का संचालित होता था वार्ड, 57 हो जाएगी संख्या
-बच्चे की संख्याा अधिक होने पर एक बेड पर दो बच्चों को करना पड़ता था भर्ती
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में अब बच्चों का इलाज और बेहतर हो सकेगा, क्योंकि मेडिकल कॉलेज में 42 बेड का पीआईसीयू बन रहा है, जिसका निर्माण कार्य आखिर चरण में है। माह के अंत तक कार्य पूरा हो जाएगा और वार्ड संचालित होना शुरू हो जाएगा। इसके शुरू होने से गोरखपुर और लखनऊ रेफर होने वाले मरीजों को यहीं पर आसानी से इलाज मिल सकेगा। अब बेड की संख्या बढ़कर 15 से 57 हो जाएगी।
जिला अस्पताल के मेडिकल कॉलेज से संबद्ध होने के बाद मरीजों की तादाद बढ़ गई है। लेकिन अधिकांश सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। कारण अधिकांश व्यवस्था पुरानी है। इसमें बच्चों के पीआईसीयू वार्ड की क्षमता मात्र 15 बेड की है। ऐसे में मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद एक-एक बेड पर दो-दो मरीजों को भर्ती करना पड़ता है। अधिकांश मामलों में रेफर कर देना पड़ता है। जिससे मरीजों को गोरखपुर और निजी अस्पताल में जाना पड़ता है। इसमें समय की बर्बादी के साथ ही आर्थिक नुकसान भी होता है।
मरीजों की समस्याओं को देखते हुए मेडिकल काॅलेज में पीआईसीयू वार्ड में बेड़ बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। जरूरत को देखते हुए 42 बेड और बनाने के लिए काम शुरू हुआ। 66 लाख रुपये की लागत से 42 बेड का सुविधाओं से लैस वेंटीलेटर लगाने की कवायद आगे बढ़ी। एमसीएच विंग महिला अस्पताल में वार्ड बनाया जा रहा है, जिसका काम अंतिम चरण में है।
वार्ड तैयार होने वाला है। रंगाई पुताई और वायरिंग, ऑक्सीजन सप्लाई का कार्य हो चुका है। बेड लगाने और वार्ड चालू कराने का कार्य होना है, जो इसी माह के आखिरी सप्ताह में पूरा हो जाएगा। इसके अस्तित्व में आने के बाद मरीजों को काफी राहत मिलेगी।
-
मौसमी बीमारी में एक बेड पर भर्ती होते हैं दो मरीज
बारिश का समय शुरू होने के बाद जुलाई से लेकर नंवबर माह तक बुखार के मरीज अधिक आते है। ऐसे में बेड की कमी होने कारण एक बेड़ पर जो छोटे बच्चे होते हैं। उन्हें एक बेड पर दो बच्चों को भर्ती करना पड़ता है। लेकिन इस वार्ड के बने जाने के बाद यह समस्या दूर हो जाएगी। बारिश में बीमारी पड़ने वाले दिमागी बुखार और सामान्य बुखार के रोगियों को समस्या नहीं होगी।
-
एक माह में 300 से 400 बच्चे होते हैं भर्ती
15 बेड के पीआईसीयू वार्ड में मरीजों की संख्या की बात करें तो हर माह औसतन 300 से 400 बच्चे भर्ती होते हैं, इसमें अधिकांश निमोनिया सहित अन्य बीमार के शिकार वाले होते हैं। बेड ऑक्सीजन सहित सभी सुविधाओं से लैस है। छह माह से लेकर 14 साल तक बच्चों को इस वार्ड में भर्ती करके इलाज किया जाता है।
-
बोले जिम्मेदार
पीआईसीयू वार्ड मात्र 15 बेड का था, इसलिए मरीजों की संख्या बढ़ने पर दिक्क्त होती थी। इस समस्या को देखते हुए एमसीएच विंग में 42 बेड का वार्ड बनाया जा रहा है। जिसका कार्य आखिरी चरण में और इसे पूरा कर दिया जाएगा। अलगे माह शुरू करने का प्रयास है।
- डॉ. एके झा, सीएमएस