- कहीं श्यामपट से तो कहीं एक ही प्रश्न पत्र से एक साथ दर्जनों बच्चों ने देखकर लिखा प्रश्न
-जिले के 2262 परिषदीय विद्यालयों में बृहस्पतिवार से शुरू हुई परीक्षा
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहपुर। जिले के 2262 परिषदीय विद्यालयों में सत्र परीक्षा बृहस्पतिवार से शुरू हो गई है लेकिन विद्यालयों को ना तो प्रश्न पत्र मिला है और ना ही उत्तर पुस्तिका। शिक्षक निजी खर्च से प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिका खरीद कर परीक्षा करवा रहे हैं। शासन हर तीसरे माह में सत्र परीक्षा कराने का परिषदीय विद्यालयों को निर्देश देता है लेकिन इसके लिए कोई भी बजट आवंटित नहीं किया जाता है। शिक्षकों को अपने पास से परीक्षा करानी होती है। परीक्षा के लिए प्रश्न पत्र और उत्तर पुस्तिका बच्चों में वितरित कराना जिम्मेदार भूल गए हैं। बच्चों ने कहीं श्यामपट पर लिखे प्रश्नों को देखकर उत्तर पुस्तिका में लिखा तो कहीं एक ही प्रश्न पत्र के सहारे दर्जनों बच्चे प्रश्न लिखते हुए दिखाई दिए। जिले के अधिकांश विद्यालयों का यही हाल है।
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पड़ताल में यह बात आई सामने
केस नंबर एक
समय- करीब दोपहर 12 बजे
भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र में प्राथमिक विद्यालय रामवापुर उर्फ नेबुआ में बच्चे श्यामपट से देखकर उतर पुस्तिका में प्रश्न लिख रहे थे। प्रधानाचार्य आलोक त्रिपाठी ने पूछने पर बताया कि शासन स्तर से प्रश्न पत्र ही नहीं उत्तर पुस्तिका भी नहीं मिली है। निजी खर्च से बच्चों के लिए बाजार से खरीद कर लाए हैं। हमारे विद्यालय में 140 बच्चों का नामांकन था लेकिन 87 बच्चे ही उपस्थित है। सभी बच्चों को उत्तर पुस्तिका वितरित कर परीक्षा कराया जा रहा है।
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केस नंबर दो
खुनियांव ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय कटया मुस्तहकम में दोपहर करीब 12:30 बजे एक ही प्रश्न पत्र के सहारे दर्जनों बच्चे उत्तर पुस्तिका में प्रश्न लिख रहे थे। प्रधानाचार्य नियाज अहमद ने बताया कि विद्यालय में 54 बच्चों का नामांकन है और 42 बच्चे की उपस्थित हैं। निजी खर्च से कंप्यूटर की दुकान से कुछ प्रश्न पत्र छपवा कर लाए हैं। प्रश्नपत्रों की संख्या की कमी है इसलिए बच्चे एकत्रित हो कर प्रश्न पत्र देखकर लिख रहे हैं। 700 रुपए खर्च कर प्रश्न पत्र और उत्तर पुस्तिका बच्चों के लिए खरीद कर बाजार से लाए हैं।
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केस नंबर तीन
कंपोजिट पूर्व माध्यमिक विद्यालय डुमरियागंज में दोपहर करीब 01:35 बजे अधिकतर बच्चे अपने-अपने प्रश्नों को हल कर चुके थे। प्रधानाचार्य श्रीमती कमल मोहनी ने कहा हमारे स्कूल में 340 बच्चों का नामांकन है जिसमें से 225 बच्चे उपस्थित हैं। निजी खर्च से बच्चों के लिए उत्तर पुस्तिका बाजार से खरीद कर लाई हूं। प्रश्न श्यामपट पर लिखा गया था जिसे बच्चों की उत्तर पुस्तिका में लिखा दिया गया है।
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बोले जिम्मेदार
परीक्षा कराने के बाद परीक्षा में आया हुआ खर्च प्रधानाचार्य के खाते में शासन से भेजा जाता है। जबकि पहले से ही काॅपी व पेपर खरीदने का कोई भी व्यवस्था शासन से नहीं है।
देवेंद्र कुमार पांडेय, बीएसए