सिद्धार्थनगर। इंसेफेलाइटिस से जूझते गांवों में स्वास्थ्य, पंचायती राज और जलनिगम का साझा अभियान चलेगा। स्वास्थ्य विभाग प्रभावित गांवों में मरीजों के परीक्षण और दवाओं के छिड़काव का काम करेगा तो पंचायती राज विभाग की ओर से साफ-सफाई पर विशेष जोर दिया जाएगा। इस दौरान हैंडपंपों, कुओं के पानी का क्लोरीनेशन भी किया जाएगा, जिससे ग्रामीणों को शुद्ध पानी मिल सके।
नेपाल सीमा पर स्थित जिला इंसेफेलाइटिस के डेंजर जोन में है। हर साल दर्जनों बच्चों की मौत हो जा रही है। पीड़ितों की संख्या के आंकड़ों के आधार पर ऐसे गांव चिह्नित किए जा रहे हैं, जहां इंसेफेलाइटिस का खतरा सर्वाधिक है। अब तक 264 गांव सूचीबद्ध हुए हैं। इन गांवों को बीमारी से मुक्त बनाने के लिए शासन ने विभिन्न विभागों के माध्यम से साझा अभियान चलाने का निर्देश दिया है। इसके केंद्र में स्वास्थ्य विभाग होगा, जबकि जलनिगम, पंचायती राज, बाल विकास, पशु पालन विभाग इनके साथ काम करेंगे।
स्वास्थ्य विभाग को चिह्नित गांवों में विशेष मेडिकल कैंप लगाकर लोगों का परीक्षण करने, दवाओं का छिड़काव कराने का निर्देश दिया गया है। कैंप के दौरान लोगों के खून की जांच की भी व्यवस्था रहेगी। पंचायती राज विभाग को विशेष स्वच्छता अभियान चलाने की हिदायत दी गई है। पशुपालन विभाग यह सुनिश्चित कराएगा कि आबादी के बीच पल रहे पशु बीमारी के संक्रमण से ग्रसित नहीं है। उनकी नियमित जांच व टीकाकरण होगा। दूषित पेयजल के चलते बीमारी को रोकने के लिए जलनिगम को हैंडपंपों, कुओं के पानी में क्लोरीन की गोली नियमित अंतराल में डालने को कहा गया है।
साथ ही बाल विकास विभाग इन गांवों में बच्चों के कुपोषण पर निगरानी रखेगा। साझा अभियान के लिए शासन के निर्देश के बाद विभागों की सक्रियता बढ़ गई है। सीएमओ डॉ. वेदप्रकाश शर्मा ने बताया कि इंसेफेलाइटिस प्रभावित गांवों के लिए दवा छिड़कावों का कार्य एक बार हो चुका है। अब जल्द ही दूसरे चरण के तहत छिड़काव आरंभ होगा। साझा अभियान की रुपरेखा बनाई जा चुकी है। सभी विभाग मिलकर इससे निपटने की योजना पर कार्य कर रहे हैं।