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छोटे बैग के अभाव में बर्बाद हो रहा है ब्लड

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छोटे बैग के अभाव में बर्बाद हो रहा है ब्लड
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ब्लड बैंक में नहीं है बच्चों को खून चढ़ाने के लिए 100 एमएल का बैग
बैग और ऑटोमेटिक मशीन हो तो बेकार नहीं होगा ब्लड
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। संयुक्त जिला चिकित्सालय के ब्लड बैंक में बच्चों को खून चढ़ाने के लिए छोटे आकार के बैग नहीं होने के कारण हर महीने करीब 20 यूनिट ब्लड बर्बाद हो रहा है। सामान्य मरीजों के रेफ्रिजरेटर में रखे गए एक यूनिट के अंतर्गत 350 एमएल ब्लड से 100 एमएल बच्चों के लिए निकाला जाता है, जबकि एक बार खुलने के बाद शेष 250 एमएल ब्लड का कोई उपयोग नहीं हो पाता है।
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माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध संयुक्त जिला चिकित्सालय के ब्लड बैंक में कई वर्षों से छोटे आकार के बैग की आपूर्ति नहीं हुई है। मेडिकल कॉलेज के अस्तित्व में आने के बाद अस्पताल की क्षमता निरंतर बढ़ रही है। सामान्य मरीजों के साथ शिशु एवं बाल रोग विभाग में मरीजों की संख्या बढ़ रही है। ऐसी स्थिति में पहले की अपेक्षा अधिक बच्चों को खून चढ़ाया जा रहा है। डॉक्टरों के अनुसार प्रति माह 25 से 35 यूनिट ब्लड बच्चों को चढ़ाया जाता है। यदि बड़े बैग से छोटे बैग में ब्लड ट्रांसफर करने वाली मशीन और छोटे आकार बैग हो तो करीब 20 यूनिट ब्लड को उपयोग में लाया जा सकता है। ऑटोमेटिक मशीन के माध्यम से पैकेट बनाने में ब्लड में एयर नहीं जाएगा और 100 एमएल ब्लड का बैग भी भर जाएगा। इसके साथ 100 एमएल के बैग में मिलाई जाने वाली रसायन की मात्रा भी सही होगी। ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ. मनोज त्रिपाठी ने बताया कि जब बच्चों को खून चढ़ाया जाता है तो कोशिश की जाती है कि किसी परिजन का ब्लड ग्रुप मैच हो जाए और 100 एमएल ही निकाला जाए। इस मामले में संयुक्त जिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. नीना वर्मा ने बताया कि नेशनल एड्स कंट्रोल आर्गनाइजेशन को 100 एमएल के बैग की डिमांड भेजी गई है। बैग और ऑटोमैटिक मशीन प्राप्त होगी तो उसका उपयोग किया जाएगा।
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