सकारपार। सड़क सुरक्षा को लेकर जहां सरकार के अलावा तमाम निजी कंपनियों द्वारा आए दिन लोगों को जागरूक किया जा रहा है। वहीं, बांसी- धानी मार्ग पर सड़क सुरक्षा से जुड़ी लापरवाही दिखने लगी है।
सफर करने वाले लोगों की सुविधा और सुरक्षित परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विभाग की ओर से सड़क दोनों किनारों और बीचो-बीच बनाई गई सफेद पट्टी अब पूरी तरह धुंधली पड़ चुकी है। ऐसी स्थिति में विशेषकर रात के समय घने कोहरे में वाहन चालकों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, हादसे का खतरा बढ़ गया है। कई हादसे होने के बाद भी जिम्मेदार समस्या से बेखबर हैं।
बांसी-धानी मार्ग की लंबाई 30 किलोमीटर है। यह सड़क बांसी से निकलकर धानी बाजार होते हुए गोरखपुर और सोनौली बाॅर्डर तक जाती है। इस सड़क से बांसी के अलावा इटवा, डुमरियागंज से निकलकर आमजन के साथ बड़े पैमाने पर व्यापारी वर्ग भी गोरखपुर तक की सफर तय करते हैं। साथ ही इस सड़क पर कई शिक्षण संस्थान भी पड़ते हैं, जहां सुबह- सुबह भारी संख्या में छात्र और छात्राएं पढ़ाई करने के लिए जाते हैं। सड़क बनने के समय ही सफेद डिवाइडिंग लाइन डाली गई थी, जिससे रात में वाहन संचालित करना आसान हो गया था, लेकिन समय के साथ पट्टी मिटने लगी और अब कई जगहों पर बिल्कुल दिखाई नहीं देती है। ऐसे में सामने से आ रहे वाहन का रुख पहचानना मुश्किल हो जाता है।
क्षेत्रीय लोगों के अनुसार, पिछले वर्ष भी इसी मार्ग पर कोहरे के दौरान कई छोटे-बड़े हादसे हो चुके हैं। सड़क पर मौजूद सफेद पट्टी वाहन चालकों के लिए दिशा सूचक की तरह काम करती थी, लेकिन अब इसके धुंधले होने से हादसों का खतरा दोगुना हो गया है। कोहरा बढ़ने पर आगे का रास्ता साफ दिखाई नहीं देता है। ऐसे में आगे चल रही गाड़ी की दूरी या दिशा का अनुमान लगा पाना बेहद कठिन हो जाता है।
क्षेत्र के बृजेश चौबे, दिनमणि उपाध्याय, जगदीश विश्वकर्मा, मनोज, रोहित त्रिपाठी, अनुज कुमार सिंह, दीपक त्रिपाठी, राकेश शुक्ला आदि वाहन चालकों ने बताया कि कई बार सामने से आ रही गाड़ी अचानक बहुत पास आने पर दिखाई देती है, जिससे ब्रेक लगाने या रास्ता बदलने का समय तक नहीं मिल पाता है।