सिद्धार्थनगर। पंचायतों में निर्वाचित बोर्ड का कार्यकाल खत्म होने के बाद प्रशासक तो नियुक्त कर दिए गए लेकिन उनके अधिकार स्पष्ट नहीं होने से जिला पंचायत और 14 क्षेत्र पंचायतों में विकास कार्यों की रफ्तार थम गई थी। अब शासन ने प्रशासकों के अधिकार और कार्यसीमा स्पष्ट कर दी है।
इससे पहले से स्वीकृत कार्यों के सत्यापन, भुगतान और लंबित निर्माण कार्यों को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। पहले से स्वीकृत और निर्माणाधीन सड़क, नाली व पुलिया के काम पूरे होने के बाद भी भुगतान हो सकेंगे। भुगतान के लिए कार्यालयों के चक्कर काट रहे ठेकेदार को भी राहत मिलेगी। वहीं जिला पंचायत के कर्मचारियों का दो माह वेतन भी मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायतों ने मार्च में वित्तीय वर्ष के लिए करोड़ों रुपये का विकास बजट पारित किया था लेकिन निर्वाचित बोर्ड का कार्यकाल खत्म होने के बाद प्रशासक नियुक्त होने और उनके अधिकारों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं होने से विकास कार्यों की प्रक्रिया प्रभावित हुई। खासकर जिन कार्यों में निर्माण हो चुका था और भुगतान की प्रक्रिया बाकी थी, उनमें गतिरोध बना रहा। इसका असर गांवों में भी दिखाई दिया। सड़क, नाली और पुलिया जैसे कामों में जहां निर्माण पूरा हो चुका था, वहां भुगतान अटका रहा।
निर्माणाधीन कामों की अगली प्रक्रिया भी प्रभावित हुई। भुगतान नहीं होने से ठेकेदारों की रकम फंस गई और नए कामों में पूंजी लगाने की क्षमता प्रभावित हुई। दूसरी ओर जिला पंचायत कर्मचारियों के वेतन को लेकर भी परेशानी रही।
अब इन कामों को मिलेगी रफ्तार ःनई गाइडलाइन के बाद जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायतों में पहले से स्वीकृत, अनुमोदित, निर्माणाधीन और पूर्ण हो चुके कार्यों का भौतिक एवं तकनीकी सत्यापन कराया जा सकेगा। इसके बाद संबंधित कार्यों का भुगतान भी प्रशासक करा सकेंगे। यानी पहले से मंजूर सड़क, नाली, पुलिया और अन्य निर्माण कार्यों में जो काम सिर्फ भुगतान या प्रशासनिक प्रक्रिया के कारण अटके थे, उनके आगे बढ़ने का रास्ता साफ होगा।
जिला पंचायत में तैनात कर्मचारियों का वेतन भी नियमित कार्य के तहत प्रशासक आहरित कर सकेंगे। इससे वेतन को लेकर बना गतिरोध दूर होने की उम्मीद है।