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Siddharthnagar News: 10 किमी का चक्कर लगाकर इलाज कराने पहुंच रहे मरीज

Wed, 14 Oct 2026 12:07 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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- एनएचएम कर्मियों की हड़ताल, पीएचसी पर मरीजों का दबाव बढ़ा, अधिक दौड़ लगाने को विवश
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- दो सप्ताह से प्रभावित स्वास्थ्य सेवाएं, वैक्सीनेशन और गर्भवतियों की देखभाल पर भी असर
बढ़नी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के कर्मचारियों की मांगों को लेकर चल रहे कार्य बहिष्कार से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। इसका असर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बढ़नी पर भी पड़ रहा है। आसपास के गांवों में संचालित आरोग्य मंदिरों में सेवाएं बंद होने से मरीजों का दबाव पीएचसी पर बढ़ गया है। ग्रामीणों को छोटी-मोटी बीमारियों के उपचार के लिए भी कई किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ रहा है। वहीं, वैक्सीनेशन और गर्भवतियों की देखभाल भी प्रभावित हो रही है।
हड़ताल से पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर ओपीडी में 78 मरीज पहुंचे थे। इसके बाद मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हुई। चार अक्तूबर को 163, 11 को 164 और 12 अक्तूबर को 146 मरीजों का उपचार किया गया। चिकित्सकों के अनुसार, इन दिनों उल्टी-दस्त, बुखार, खांसी और सांस फूलने की शिकायत लेकर मरीज पहुंच रहे हैं। छोटे बच्चों में भी मौसमी बीमारियों के लक्षण मिल रहे हैं।
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छह किलोमीटर दूर से उपचार कराने पहुंचे मरीज
ग्राम हाटी निवासी रामकिशन ने बताया कि वह करीब छह किलोमीटर की दूरी तय कर पीएचसी बढ़नी पहुंचे हैं। उनके गांव के पास खुरहरिया में आरोग्य मंदिर संचालित है, लेकिन वहां सेवाएं बंद होने से छोटी-मोटी बीमारियों के उपचार के लिए भी बढ़नी आना पड़ रहा है। वहीं, बलरामपुर जिले के ग्राम सतना निवासी बाबूराम ने बताया कि बुखार होने पर उपचार के लिए उन्हें अस्पताल आना पड़ा। स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने से परेशानी उठानी पड़ रही है।

संक्रामक बीमारियों से बचाव की सलाह
ओपीडी में तैनात चिकित्सक डॉ. प्रदीप वर्मा ने बताया कि इन दिनों बच्चों में उल्टी-दस्त और बुखार के मामले सामने आ रहे हैं। वयस्कों में खांसी, वायरल बुखार और सांस फूलने की शिकायतें भी मिल रही हैं। उन्होंने लोगों को साफ-सफाई रखने, मच्छरदानी का इस्तेमाल करने और स्वच्छ पानी पीने की सलाह दी। पानी की शुद्धता को लेकर संदेह होने पर उसे उबालकर पीने को कहा।
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वैक्सीनेशन और गर्भवतियों की देखभाल प्रभावित
एनएचएम कर्मचारियों के कार्य बहिष्कार से नियमित स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर पड़ रहा है। बच्चों के टीकाकरण, गर्भवतियों की देखभाल और जन्म प्रमाणपत्र सहित अन्य सुविधाओं को लेकर लोगों को परेशानी हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में आरोग्य मंदिरों पर निर्भर लोगों को इलाज के लिए दूर स्थित अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
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