शोहरतगढ़। शारदीय नवरात्र को शक्तिपीठ पल्टादेवी की सफाई की गई। मंदिर मंदिर परिसर सहित आसपास जगहों कि सफाई कर सजाया गया। सोमवार से नौ दिन तक आदि शक्ति पल्टादेवी की पूजा व मेले की धूम रहेगी और दशहरा के दिन मेला लगेगा। इसकी तैयारी पूरी कर ली गई है। मां की पूजा करने लिए पड़ोसी देश नेपाल से भी लोग बड़ी संख्या में आते हैं।
जानकारों के मुताबिक, किंवदंती है कि पांडवों ने आदि शक्ति मां पल्टादेवी की स्थापना की थी। मां पल्टादेवी के दर्शन के लिए पड़ोसी देश नेपाल व दूर-दराज से श्रद्धालु आते हैं और मन्नतें मांगते हैं। साल के सभी दिन मां के दरबार में भक्तों की भीड़ रहती है। यहां हलवा व पूरी भी चढ़ाई जाती है। मंदिर की पुरानी ईंटें इसकी प्राचीनता की गवाही देती हैं। जमुआर नदी के पास स्थित मां पल्टादेवी का ऐतिहासिक मंदिर महाभारत कालीन है।
पांडवों का यही भाग्योदय हुआ, जिसके बाद से ही इस मंदिर का नाम पल्टादेवी पड़ गया और पल्टादेवी भाग्य की अधिष्ठात्री देवी के रूप में स्थापित हो गई। वर्तमान में इस मंदिर को शक्ति पीठ का दर्जा मिला हुआ है।
इस स्थान पर भगवान शिव तथा अन्य देवी-देवताओं के मंदिर भी हैं। यह मंदिर लंबे समय से भक्तों की आस्था का प्रतीक है। इस मंदिर में प्रदेश के बलरामपुर, गोंडा, बस्ती, संतकबीरनगर, महराजगंज, गोरखपुर आदि के अलावा पड़ोसी देश नेपाल के श्रद्धालु भारी संख्या में आते हैं। कहा जाता है कि इस मंदिर से कोई भी व्यक्ति खाली हाथ नहीं लौटता।
मुंडन कराने आते हैं लोग: यहां पर स्थित सरोवर में स्नान का अपना अलग ही महत्व है। दूर-दूर से लोग यहां बच्चों का मुंडन आदि कराने के लिए आते हैं। माना जाता है कि जिन बच्चों का मुंडन संस्कार यहां मां के दरबार में होता है, वे यशस्वी एवं दीर्घायु होने के साथ ही कुल का नाम रोशन करते हैं। चैत नवरात्र में यहां नौ दिन मेला लगता है। मंदिर के प्रांगण में झूला, सर्कस, जलपान, खिलौने, और नारियल चुनरी की दुकानें सजी हुई हैं, जिसमें आए हुए श्रद्धालु मां का आशीर्वाद लेने के बाद मेले का लुप्त और मनोरंजन करते हैं।ज