हरैया ग्राम पंचायत में तीन साल पहले कराए गए कार्यों की जांच में सामने आई अनियमितता, जिलाधिकारी के आदेश पर हुई कार्रवाई
सिद्धार्थनगर। जोगिया विकासखंड के ग्राम पंचायत हरैया में करीब तीन वर्ष पूर्व मनरेगा के तहत कराए गए मिट्टी कार्यों में अनियमितता का मामला सामने आया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर कराई गई जांच में परियोजनाओं के छह बिंदुओं पर कुल 88,736.58 रुपये का विचलन पाया गया। जांच रिपोर्ट के आधार पर सरकारी धन के दुरुपयोग और मनरेगा कार्यों में घोर अनियमितता के आरोप में निवर्तमान ग्राम प्रधान समेत चार लोगों के खिलाफ कोतवाली जोगिया उदयपुर में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है, जिनमें तीन ग्राम विकास अधिकारी शामिल हैं। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
मामला ग्राम पंचायत हरैया का है। गांव निवासी कपिलदेव ने 18 फरवरी 2026 को जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर ग्राम पंचायत में मनरेगा के तहत कराए गए मिट्टी के कार्यों में अनियमितता की शिकायत की थी। शिकायत में कार्यों की गुणवत्ता, अभिलेखों और खर्च से संबंधित अनियमितताओं की जांच कर कार्रवाई की मांग की गई थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने मामले की जांच के आदेश दिए।
जिलाधिकारी के आदेश के क्रम में जिला उद्यान अधिकारी, सिद्धार्थनगर को जांच अधिकारी नामित किया गया। जांच के दौरान तकनीकी सहयोग के लिए ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, जोगिया के अवर अभियंता को भी लगाया गया। जांच टीम ने ग्राम पंचायत में कराए गए मनरेगा से संबंधित कार्यों और उपलब्ध अभिलेखों का परीक्षण किया।
जांच अधिकारी ने 18 मई 2026 को अपनी जांच आख्या प्रस्तुत की। रिपोर्ट में मनरेगा की विभिन्न परियोजनाओं से संबंधित छह बिंदुओं पर वित्तीय गड़बड़ी का उल्लेख किया गया। इन सभी छह मदों को जोड़ने पर कुल 88,736 रुपये का अंतर सामने आया। जांच रिपोर्ट में सभी परियोजनाओं को मनरेगा से संबंधित बताया गया है।
जांच के बाद ग्राम पंचायत हरैया के निवर्तमान ग्राम प्रधान अब्दुल कयूम के अलावा ग्राम विकास अधिकारी सुभाष चंद्र, आशीष पांडेय और अनिल मिश्रा की भूमिका पर सवाल उठाए गए। कार्यक्रम अधिकारी/खंड विकास अधिकारी, जोगिया रामानंद वर्मा की ओर से 13 अगस्त 2026 को कोतवाली जोगिया उदयपुर में तहरीर दी गई।
तहरीर में कहा गया है कि जांच के बाद मनरेगा कार्यों में घोर अनियमितता सामने आई है, जिससे सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है। जिलाधिकारी के आदेश और संबंधित पत्रों के आधार पर नामित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए पुलिस को तहरीर दी गई।
मामले से संबंधित जिलाधिकारी कार्यालय के पत्र के साथ जांच रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज भी पुलिस को उपलब्ध कराए गए। 17 अगस्त 2026 को थाने में अभियोग पंजीकृत करने का आदेश दिया गया। इसके बाद पुलिस ने आरोपों के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।