फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Siddharthnagar News: हजरत अली ने दिया सच्चाई और इंसाफ के रास्ते पर चलने का पैगाम

Fri, 02 Jan 2026 11:52 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
विज्ञापन
डुमरियागंज के हल्लौर स्थित जामा मस्जिद की की गई विधिवत रूप से सजावट। संवाद - फोटो : सडक हादसे में क्षतिग्रस्त हुई कार
विज्ञापन
- सत्य, इंसाफ, सहनशीलता के पुजारी थे हजरत अली
विज्ञापन


- 13 रजब, हजरत अली के जन्मदिन पर विशेष
डुमरियागंज। मुसलमानों के पहले इमाम एवं चौथे खलीफा हजरत अली सत्य, इंसाफ और सहनशीलता के पुजारी थे। उन्होंने दुनिया को हमेशा हक, अमन, सच्चाई और इंसाफ के रास्ते पर चलने का पैगाम दिया।
हल्लौर स्थित शिया जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना शहकार हुसैन जैदी ने बताया कि हजरत अली इब्ने अबू तालिब का जन्म अरबी महीने की 13 रजब 24 हिजरी पूर्व इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक (17 मार्च सन 30 अमूल फील) को मुसलमानों के सबसे पवित्र और तीर्थ स्थल खाना-ए- काबा के अंदर हुआ था। उनकी शहादत 21 रमजान को कूफा की मस्जिद में नमाज अदा कराते समय अब्दुर्रहमान इब्ने मुलजिम द्वारा जहर बुझी तलवार से हमला करके बुरी तरह जख्मी कर देने से 661 ईस्वी में हुई थी।
विज्ञापन

वे पैगंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब के चचेरे भाई और दामाद थे। उनका चर्चित नाम हजरत अली है। वे शिया मुसलमानों के पहले इमाम और चौथे खलीफा जाने जाते हैं। उन्होंने 656 से 661 तक राशीदून खिलाफत के चौथे खलीफा के रूप में शासन किया और शिया इस्लाम के अनुसार वे 632 से 661 तक इमाम थे। उन्होंने वैज्ञानिक जानकारियों को बहुत ही विस्तार और रोचक ढंग से आम आदमी तक पहुंचाया था। पैगंबरे इस्लाम के दामाद और मुसलमानों के चौथे खलीफा हजरत अली एक ऐसी आदर्श शख्सियत थे, जिन्होंने अपना जीवन अल्लाह के हुक्म के मुताबिक बिताया। इस्लामी इतिहास के मुताबिक इमाम और खलीफा होने के बाद भी उनके जीवन का बड़ा हिस्सा अल्लाह की इबादत में बीता था। कहा जाता है कि इंसानी कलम में इतनी ताकत नहीं की इमाम अली की तारीफ (विशेषता) का वर्णन कर सके। आज के दौर में हजरत अली का जीवन दर्शन प्रसांगिक है।
विज्ञापन



आज आयोजित होंगी महफिल-ए-मिलाद, निकलेगा जुलूस
हजरत अली की जयंती के अवसर पर शनिवार को डुमरियागंज क्षेत्र के कस्बा हल्लौर सहित मुस्लिम बहुल इलाकों में महफिल मिलाद का आयोजन किया जाएगा। साथ ही जुलूस-ए-हैदरी निकालकर हजरत अली को मानने वाले उनके बताए हुए हक इंसाफ और सच्चाई के रास्ते पर चलने का संकल्प लेंगे। जगह-जगह लंगर का भी इंतजाम किया गया है। जिले में हजरत अली के जन्मदिन पर विशेष आयोजन हल्लौर और भटगवां में किया गया है। लगातार तीन दिन तक महफिल-ए-मिलाद का कार्यक्रम चलता रहेगा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें