महुलानी स्थित प्राचीन मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गुरु-शिष्य परंपरा का हुआ सम्मान
सिद्धार्थनगर। खेसरहा क्षेत्र के महुलानी गांव स्थित प्राचीन श्रीरामेश्वर शिव मंदिर परिसर में गुरु पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा, भक्ति और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गुरु पूजन कर गुरु-शिष्य परंपरा का सम्मान किया गया। श्रद्धालुओं ने गुरुजनों का आशीर्वाद प्राप्त कर उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
कार्यक्रम का नेतृत्व संस्कृत विद्यालय के पूर्व प्रधानाचार्य पंडित इंद्रासन मिश्रा ने किया। उन्होंने गुरु पूर्णिमा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु को ज्ञान, संस्कार और जीवन मार्गदर्शन का सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। गुरु के सान्निध्य से ही व्यक्ति का सर्वांगीण विकास संभव होता है।
इस दौरान पंडित इंद्रासन मिश्रा ने श्री रामेश्वर शिव मंदिर के ऐतिहासिक महत्व की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि यह स्थल महान तपस्वी बलिकरन बाबा की साधना भूमि रहा है। वर्ष 1927 में राम प्रसाद मिश्रा ने यहां विद्या विनोद संस्कृत पाठशाला की स्थापना की थी, जो वर्तमान में अपना शताब्दी वर्ष मना रही है। इसी के साथ उन्होंने श्री रामेश्वर शिव मंदिर का भी निर्माण कराया था, जो आज क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 1991 से इस पावन स्थल पर प्रत्येक गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गुरु पूजन और गुरुजनों के सम्मान की परंपरा निरंतर निभाई जा रही है। इस आयोजन में क्षेत्र के शिष्य, पूर्व छात्र और श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल होकर गुरु परंपरा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हैं।
कार्यक्रम में पंडित उपेंद्र पांडेय, पंडित विनय त्रिपाठी सहित अनेक शिष्य, श्रद्धालु एवं क्षेत्रीय गणमान्य लोग उपस्थित रहे।