सिद्धार्थनगर। कमर में जकड़न और पैर-हाथ में सुन्नपन और दर्द के मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। अनदेखी में यह बीमारी जटिल समस्या का रूप लेती जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय से ऑपरेशन न होने से लकवा सहित अन्य अंगों के प्रभावित होने की आशंका बढ़ जा रही है। आंकड़ों पर गौर करें तो नसों से जुड़ी समस्या लेकर सात माह में करीब नौ हजार मरीज मेडिकल कॉलेज पहुंचे, इनमें से लगभग सात हजार मरीज केवल बैकपेन यानी कमर में गंभीर दर्द की शिकायत लेकर आए हैं।
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में न्यूरो सर्जरी विभाग के विभागीय रिकॉर्ड के विश्लेषण से सामने आया है कि बैक पेन अब सामान्य दर्द की समस्या नहीं रह गई बल्कि यह तेजी से नसों से जुड़ी जटिल बीमारी का रूप ले रही है। जुलाई से जनवरी के बीच न्यूरो सर्जरी ओपीडी के मरीजों का अध्ययन बताता है कि नस से संबंधी बीमारियों के करीब 9 हजार मरीज कॉलेज अस्पताल पहुंचे।
अधिकतर मरीज शुरुआती लक्षणों के समय इलाज के लिए नहीं पहुंचे। दर्द को मामूली समझकर महीनों तक घरेलू उपचार या पेन किलर पर निर्भर रहे। जब दर्द असहनीय हुआ, चलने-फिरने में परेशानी बढ़ी या हाथ-पैर में सुन्नपन आया, तब मरीज मेडिकल कॉलेज पहुंचे। जांच में सामने आया कि कई मामलों में स्पाइन की नसों पर दबाव, ब्लॉकेज जैसी स्थिति बन चुकी थी। विभागध्यक्ष के अनुसार रिकॉर्ड बताता है कि मुताबिक करीब 10 प्रतिशत मरीज ऐसे पाए गए, जिन्हें तत्काल सर्जरी की आवश्यकता थी, लेकिन इन मामलों में भी एक बड़ी बाधा सामने आई। ऑपरेशन का डर।
डॉक्टरों के अनुसार कई मरीज सर्जरी को आखिरी और खतरनाक विकल्प मानकर इलाज टालते रहे, जिससे उनकी स्थिति और गंभीर होती चली गई। जबकि सर्जरी बिना रिस्क की है।
कई मरीजों को पुरानी चोट या एक्सीडेंट के बाद धीरे-धीरे नसों की समस्या विकसित हुई। वहीं, कुछ में लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठकर काम करने वाले युवा मरीजों में भी स्पाइन से जुड़ी दिक्कतें बढ़ीं पाई गई। सबसे गंभीर बात यह रहा है कि इन मरीजों में 10 प्रतिशत ऐसे मरीज सामने आई, जिनको तत्काल सर्जरी की जरूरत थी लेकिन, सर्जरी की सलाह पर डर और दवा पर मरीज अधिक भरोसा कर रहे हैं। ऐसा डॉक्टरों ने जानकारी दी।
उनका कहना था कि मरीजों को सर्जरी की सलाह तो दी जाती है, लेकिन वह साफ तौर पर मना कर देते हैं जबकि, यह सर्जरी बिना रिस्क है और पांच दिन में मरीज चलते हुए घर जा सकता है। किसी अच्छे न्यूरोसर्जन से दिखाकर ऑपरेशन कराया जा सकता है।