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Siddharthnagar News: गली-मोहल्लों से बाजार तक खतरा, लगाम के इंतजाम नहीं

Sat, 23 Aug 2025 11:10 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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रेलवे स्टेशन सिद्धार्थनगर के प्लेटफाॅर्म नंबर दो पर आपस में लड़ते हुए कुत्ते।  - फोटो : संवाद
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सिद्धार्थनगर। गांव से लेकर शहर और कस्बों तक कुत्तों का आतंक है। दिन में तो कम, लेकिन रात होते ही उनकी आक्रामकता बढ़ जा रही है। इससे आए दिन शिकार हो रहे मरीज माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी रैबीज वैक्सीन (एआरवी) लगवाने के लिए पहुंच रहे हैं।
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इतना ही नहीं जिले में नसबंदी की व्यवस्था न होने से इनकी नस्ल भी बढ़ रही है, जिससे इन पर लगाम लगाना और मुश्किल होता जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद संवाद न्यूज एजेंसी ने जिले की पड़ताल की तो चौंका देने वाले मामले सामने आए।
मेडिकल कॉलेज और सीएचसी पर कुत्तों का शिकार होने के बाद इंजेक्शन लगवाने के लिए आने वाले लोगों ने अपना दर्द बयां किया। कोई भैंस लेकर गया था, जिसे कुत्ते ने नोच लिया तो कोई बच्चा स्कूल जाते वक्त इनका शिकार बना।
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पशु विशेषज्ञ हमले के पीछे मौसम को वजह बता रहे हैं। उनका कहना है कि प्रजनन और बारिश में भोजन की किल्लत और पेट न भरने से कुत्ते हमलावर हो रहे हैं। विशेषज्ञ कुत्ताें से सतर्क रहने और काटने पर तत्काल इंजेक्शन लगवाने की सलाह सलाह दे रहे हैं। बच्चों और बुजुर्गों को ज्यादा सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
कुत्ते के शिकार लोग सुप्रीम कोर्ट की ओर से टीकाकरण से संबंधित आदेश को सही बता रहे हैं, जिससे काटने पर उतनी हानि न पहुंचे।
स्कूल जाते समय दौड़ाकर नोचा: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मिठवल तिलौली में अदनान (12) पुत्र फैजुल्लाह ग्राम डडवा राजा को रैबीज की पहली डोज लगाई गई। अदनान स्कूल जा रहा था रास्ते में कुत्ते ने दौड़ाकर पैर में काट लिया। घर वालों ने तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मिठवल तिलौली लाकर एआरवी की पहली डोज लगवाई। सीएचसी मिठवल तिलौली में शनिवार को पांच लोगों को इंजेक्शन लगाया गया।
इसलिए बदलता है व्यवहार: पशु विशेषज्ञों का कहना है कि अप्रैल से सितंबर तक गर्मी और बारिश में इनके व्यवहार में बदलाव आता है। पानी और भोजन न मिलने और ज्यादा गर्मी से इनका आक्रोश बढ़ता है। ऐसे में वह सामने वाले पर टूट पड़ते हैं। खास करके उनकी नजर में जो कमजोर दिखता है, उसपर अधिक हमलावर हो जाते हैं। ऐसे में उनसे बचने की जरूरत है। खासतौर पर बच्चों को बचाने की जरूरत है।
नियंत्रण की नहीं है कोई व्यवस्था: महानगरों में घुमंतू कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए नगर निगम की ओर से अभियान चलाकर उन्हें पकड़ा जाता है। लेकिन जिले में घुमंतू कुत्तों को पकड़ने और उन्हें नियंत्रित करने की नगर पालिका और नगर पंचायत में कोई व्यवस्था नहीं है।
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इसका नतीजा है कि घुमंतू कुत्तों की संख्या में दिन-ब-दिन वृद्धि हो रही है। आए दिन वह किसी न किसी को नोच रहे हैं।
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