सिद्धार्थनगर। कोडीन युक्त कफ सिरप को लेकर प्रदेश के कई जिलों में लगातार कार्रवाई जारी है। इसमें सीमावर्ती इलाके के मेडिकल स्टोर अब जांच एजेंसियों के रडार पर है। मेडिकल के धंधे से जुड़े लोगों के मुताबिक बॉर्डर बेल्ट में कफ सिरप की असामान्य खपत और सप्लाई के संकेत मिलने के बाद निगरानी तेज कर दी गई है।
जांच में सामने आए तथ्यों ने आशंका को पुख्ता किया है कि सीमा से सटे स्टोर तस्करी की चेन में अहम कड़ी बन रहे हैं। हाल ही में बस्ती में पकड़े गए कफ सिरप के मामले का कनेक्शन सिद्धार्थनगर से जुड़ने के बाद एजेंसियां की जांच का दायरा और बढ़ गया है।
सूत्रों के मुताबिक, सीमावर्ती 68 किलोमीटर के दायरे में मेडिकल स्टोरों की संख्या हर साल करीब 10 प्रतिशत बढ़ रही है। यह बढ़ोतरी केवल स्थानीय मांग से मेल नहीं खाती बल्कि दवाओं की अवैध आवाजाही को आसान बनाने का जरिया बन रही है। जानकारों का मानना है कि जहां आबादी बहुत नहीं है, वहां भी छोटे चौराहे और कस्बे में दवा की दुकान खुल जा रही है।
बस्ती की फर्म ने छह में दो करोड़ से अधिक कफ सिरप को खरीदा-बेचा, जिसकी जानकारी सामने आने के बाद हुई जांच में जनपद के अलग-अलग हिस्साें के अलावा नेपाल बार्डर पर पहुंचने की बात सामने आ रही है। ऐसे में एक बार फिर मंडलीय टीम एक्टिव हो गई है और चेन को तोड़ने और कड़ी से कड़ी को जोड़ते हुए आगे पहुंचने की तैयारी में जुटी है। बस्ती पुलिस भी केस दर्ज करने के बाद मामले की छानबीन शुरु की है।
सूत्र यह भी बता रहे हैं कि जिले में इंटरनल ऑडिट और फील्ड वेरिफिकेशन के दौरान कई दुकानों पर कफ सिरप की सप्लाई, बिक्री रजिस्टर और स्टॉक पैटर्न में विसंगतियां मिली हैं। सामान्य खपत की तुलना में अधिक आपूर्ति, बिलिंग में अंतर और रूटीन निरीक्षण से बचने की कोशिशें सामने आई हैं। बॉर्डर पर समय-समय पर पकड़ी कफ सिरप, नींद की प्रतिबंधित गोली, चोट के मरहम सहित दवाओं की खेप ने भी शक को और गहरा कर दिया है। जांच के जुड़े लोग सप्लाई चेन, डिस्ट्रिब्यूटर, होलसेलर और रिटेल तीनों स्तरों पर डेटा क्रॉस-वेरिफिकेशन कर रहे हैं।
इस संबंध में ड्रग इंस्पेक्टर नवीन कुमार ने बताया कि लगातार जांच किया जा रहा है। गड़बड़ी मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी।