संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। लखनऊ में दिल्ली जा रही एक बस में आग लगने से पांच यात्री जिंदा जल गए। बस में क्यों आग लगी, इसकी जांच के बाद ही खुलासा होगा। लेकिन, जिले में भी इस प्रकार की घटनाओं से इन्कार नहीं किया जा सकता है।
क्योंकि, जिले में लांग रूट के लिए बड़ी संख्या में बसों का संचालन होता है, और लोकल रूट पर डबल डेकर बस चलती है। जहां एचटी लाइन के संपर्क में आने से हादसा का खतरा बना रहता है। हादसे के बाद जब निजी बसों की पड़ताल की गई तो यहां चौकाने वाली तस्वीर सामने आई। बस में क्षमता से अधिक यात्री बैठे मिले। साथ ही आग से बचाव के लिए रखा फायर सिलिंडर किसी में मिले तो किसी में वह भी नहीं थे। फर्स्ट एड बाॅक्स भी नहीं मिला।
इसके साथ ही कई अन्य अव्यवस्थाएं मिलीं, जिससे इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता है कि जिले में भी इस प्रकार की घटना घटित हो सकती है। दो माह पहले डुमरियागंज में एक डबल डेकर बस बिजली के तार के संपर्क में आ गई और उसमें आग लग गई।
गनीमत रही कि आखिरी स्टाफ होने के कारण यात्री उतर गए थे, नहीं तो बड़ी अनहोनी हो जाती। वहीं, एआरटीओ का कहना है कि जांच अभियान शुरू कर दिया गया है। मानक पूरी नहीं करने वाले बसें नहीं चल पाएंगी।
बसों में मिली इस प्रकार की खामियां : जनपद मुख्यालय से बांसी सहित अन्य लोकल रूट पर चलने वाली बस की स्थिति को देखा गया। यहां पाया गया कि बस में फायर सिलिंडर नहीं था। इसके साथ ही बस में फर्स्ट एड बॉक्स भी नहीं मिला। साथ ही खिड़की आदि जाम मिली। जिन्हें आपात स्थिति में खोलकर आवाज लगाई जा सके या बचने की कोशिश की जा सके। यहां से नेपाल बॉर्डर और बांसी, इटवा के लिए कई बसें संचालित होती हैं।
लखनऊ, दिल्ली व मुंबई के लिए रोजाना जाती है बस : इटवा तहसील क्षेत्र के विभिन्न बाजारों से रोजाना मुंबई, दिल्ली व लखनऊ के लिए प्राइवेट बसें जाती हैं। इसमें सबसे अधिक संख्या लखनऊ जाने वाली बसों की है। लखनऊ जाने वाली बसों में प्रत्येक आधे घंटे में कोई न कोई बस लखनऊ के लिए प्रस्थान करती है। इनमें बिस्कोहर, मिठौवा, कठेला, टिकुइया, बिजौरा, बढ़या, चौखड़ा, पचउध आदि बाजारों से रोजाना बसें सुबह से शाम तक जाती हैं, और उन्हीं समय में वापस भी होती हैं। इन बसों में सवारियों की संख्या बढ़ने पर दोनों सीटों के बीच बनाए गये रास्तों में पीछे से स्टूल रखकर सवारियों को बिठाया जाता है।
सवारियां लखनऊ पहुंचने की मजबूरी में इन पर बैठ कर यात्रा करती हैं। ऐसे में किसी अनहोनी की स्थिति में रास्ते में स्टूल रखे होने व उस पर सवारियों के बैठे होने से बस से नीचे उतर पाना बहुत मुश्किल भरा कार्य है।