हॉस्टल से हंगरी सीमा तक मिले रूसी सैनिक, दिखाया अपनापन
: यूक्रेन से घर लौटे मेडिकल के छात्र सलाहुद्दीन ने बताए वहां के हालात
इटवा(सिद्धार्थनगर)। हॉस्टल से हंगरी सीमा तक सफर में मिले रूसी सैनिकों ने भारतीय छात्रों को देख अपनापन दिखाया। उनके व्यवहार में भारतीयों के प्रति प्रेम और सम्मान नजर आया। वहीं, भारतीय छात्रों की घर वापसी की कार्रवाई की दूसरे देशों के छात्र भी सराहना कर रहे थे। ये बातें यूक्रेन से शनिवार को घर लौटे इटवा कस्बे के निवासी मेडिकल छात्र सलाहुद्दीन ने कहीं।
इटवा निवासी मुहम्मद अली के पुत्र सलाहुद्दीन यूक्रेन के जयरोजिया स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी कीव से मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। युद्ध शुरू होने के बाद यूक्रेन से पांच दिनों का सफर कर आए सलाहुद्दीन ने बताया कि भारतीय दूतावास की एडवाइजरी पर 35 छात्रों का जत्था तीन किमी की दूरी तय करके रेलवे स्टेशन पहुंचा।
इसमें एक सिद्धार्थनगर मुख्यालय, एक छात्र संतकबीरनगर व अधिकांश छात्र बिहार के थे। रेलवे स्टेशन से मिली ट्रेन से वे लबीब पहुंचे और वहां से बस से ओजोरोड गए। यहां दो घंटे ओजोरोड के एक होटल में रुके, जहां से पुन: बस से यूक्रेन की सीमा स्थित चाप बस स्टेशन से होते हुए हंगरी के बुडापेस्ट हवाई अड्डे पर पहुंचे। वहां से जहाज मे बैठकर दिल्ली आए और दो दिनों तक होटल में रुकने के बाद वह अपने घर इटवा पहुंचे। इस दौरान छात्र सलाहुद्दीन खान ने अपने हॉस्टल से घर तक के सफर में भारतीय दूतावास से मिली मदद की सराहना की। उन्होंने बताया कि हम लोग सायरन सुनकर छात्रावास के नीचे बंकर में चले जाते थे, जहां कभी कभी पूरी रात बितानी पड़ती थी।
दिल्ली पहुंचे दो छात्र
भवानीगंज। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के ग्राम भड़रिया दलमीरडीह निवासी अशफाक अहमद के भाई अखलाक अहमद व राहुल पांडे शुक्रवार की देर शाम यूक्रेन से दिल्ली पहुंच गए।
अशफाक ने बताया कि शुक्रवार देर शाम को अखलाक दिल्ली पहुंच गए, जहां अपने रिश्तेदार के यहां हैं। बनगवानानकार निवासी यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्र राहुल पांडे के भाई महेंद्र प्रताप पांडेय ने बताया कि राहुल शुक्रवार की देर शाम को दिल्ली पहुंच गए। दोनों मेडिकल छात्रों के यूक्रेन से सकुशल दिल्ली पहुंचने की जानकारी मिलने से परिजनों के साथ दोनों गांव के लोग काफी खुश हैं।