- मकानों पर नंबर प्लेट और 50 रुपये शुल्क को लेकर गांवों में चर्चा, अधिकारियों ने दी सफाई
बांसी। विकास खंड मिठवल क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में मकानों पर लगाए जा रहे नंबर प्लेट और उसके एवज में 50 रुपये लिए जाने को लेकर पिछले कुछ दिनों से चर्चाओं का दौर तेज है। जनगणना प्रक्रिया के बीच अचानक शुरू हुई मकान नंबरिंग कार्य से ग्रामीणों में भ्रम की स्थिति बन गई। कई गांवों में लोगों ने आशंका जताई कि कहीं यह किसी तरह की अनधिकृत वसूली तो नहीं है।
इसी बीच सोशल मीडिया पर सहायक विकास अधिकारी पंचायत, मिठवल कार्यालय से जारी एक पत्र वायरल हुआ। इसमें राष्ट्रीय एवं राजकीय योजनाओं के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से ग्रामीण क्षेत्रों में भवनों पर नंबर प्लेट लगाए जाने और परिवारों के पंजीकरण का उल्लेख किया गया है। इसमें प्रति मकान 50 रुपये शुल्क निर्धारित होने की बात भी लिखी गई है। मामले को लेकर जब विकास खंड अधिकारी (बीडीओ) मिठवल सौरभ कुमार पांडेय से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि वह बाहर हैं और उन्हें पूरे मामले की जानकारी नहीं है। उन्होंने इस संबंध में एडीओ पंचायत से जानकारी लेने की बात कही।
एडीओ पंचायत ओम प्रकाश चौधरी ने मामले को स्पष्ट करते हुए कहा कि मकानों पर नंबर प्लेट लगाने का कार्य पूरी तरह वैधानिक प्रक्रिया के तहत कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इसके लिए विधिवत निविदा आमंत्रित की गई है और संबंधित पत्र भी जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि यह कार्य प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुरूप किया जा रहा है और इसे लेकर किसी प्रकार की भ्रांति की आवश्यकता नहीं है।
जनगणना के बीच शुरू हुई प्रक्रिया से बढ़ा भ्रम
- ग्रामीणों का कहना है कि जनगणना से जुड़ी गतिविधियां पहले से चल रही हैं, ऐसे में अचानक मकानों पर नंबर प्लेट लगाने और शुल्क लिए जाने की जानकारी सामने आने से लोगों में असमंजस की स्थिति बनी। कई गांवों में लोग इसे जनगणना प्रक्रिया का हिस्सा समझ रहे थे, जबकि अधिकारी इसे अलग प्रशासनिक प्रक्रिया बता रहे हैं। अधिकारियों ने लोगों से किसी भी तरह की शंका होने पर संबंधित विभाग से जानकारी लेने की अपील की है।