राप्ती ने तो तोड़ा कई साल के जलस्तर का रिकार्ड
सिद्धार्थनगर। कई दिनों से लाल निशान से ऊपर बह रही राप्ती का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। बुधवार को इसका जलस्तर इतना बढ़ा कि कई साल का रिकार्ड टूट गया। इससे जिले के कई जर्जर बांधों पर खतरा बढ़ गया है, जिससे लोग बड़ी तबाही मचने की आशंका से डरे हुए हैं।
खतरे के लाल निशान 84.900 मीटर की सापेक्ष बुधवार को राप्ती का जलस्तर 85.840 तक पहुंच गया है, जो अब तक 2017 में आई बाढ़ में उच्चतम जलस्तर 85.880 से सिर्फ चार सेंटीमीटर दूर है। जबकि वर्ष 2017 में इतने जलस्तर पर ही कई बांध टूट गए थे और जिले में भारी तबाही मच गई थी। ऐसे में जबकि राप्ती नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है तो नदी किनारे बने बांध के आसपास बसे गांवों के लोग तबाही की आशंका से डरे हुए हैं।
वहीं घटने के बावजूद बूढ़ी राप्ती नदी का जलस्तर खतरे के लाल निशान से 1.85 मीटर ऊपर बह रही है। जमुआर लाल निशान से 50 सेमी ऊपर है, कूड़ा नदी 1.25 मीटर ऊपर बह रही है और घोघी 35 सेमी ऊपर है। जिले में अधिकांश नदियों का जलस्तर बढ़ने से डुमरियागंज, बांसी, इटवा, नौगढ़ एवं शोहरतगढ़ क्षेत्र के कई गांव पानी से चारो तरफ से घिरे हुए हैं। इससे इन गांवों के लोगों को जरूरी सामान खरीदने के लिए नाव अथवा पैदल पानी से गुजरने की मशक्कत करनी पड़ रही है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता आरके सिंह ने बताया कि राप्ती नदी उच्चतम जलस्तर पर है। इस बार 1998 के निशान की अपेक्षा बाढ़ का स्तर ज्यादा हो गया है।
317 गांव बाढ़ प्रभावित, 115 गांव हुए मैरूंड
जिला प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार, नदियों में आए उफान से जिले के 317 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं, जबकि 115 गांव चारो तरफ से पानी से घिरे होने के कारण मैरूंड हो गए हैं। बाढ़ से प्रभावित गांव के 1.41 लाख आबादी को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 20 हजार एकड़ फसल बर्बाद हो चुकी है। इससे बाढ़ बाद इन गांवों के लोगों के सामने खाद्यान्न का संकट खड़ा होना तय है। जबकि अब तक बाढ़ पांच हजार से अधिक पशु भी प्रभावित हुए हैं। डीएम दीपक मीणा ने बताया कि प्रशासन की तरफ बाढ़ प्रभावित गांवों में लोगों की सुविधाओं के लिए 115 नाव, 16 मोटरबोट संचालित हैं। इनमें जिले के 82 नाव समेत अयोध्या से मंगाई गयी 33 नाव शामिल हैं।
350 स्थानों पर हो रहा बांधों में रिसाव
जिले के 454 किमी लंबी सभी 39 बांधों में अधिकांश बांध जर्जर हो चुके हैं। इनके जर्जर होने के कारण वर्तमान में नदियों के बढ़े जलस्तर से 350 से अधिक स्थानों पर रिसाव हो रहा है। उसे रोकने के लिए सिंचाई विभाग को बहुत मशक्कत करनी पड़ रही है। मंगलवार की रात बूढ़ी राप्ती नदी के किनारे बने उसका-लखनापार बांध में रैट होल से हो रहा रिसाव खतरनाक स्थिति में पहुंच गया था। विभागीय अधिकारियों ने ग्रामीणों के सहयोग से किसी तरह रिसाव पर काबू पाया। इसी तरह अन्य बांधों में हो रिसाव से स्थिति नाजुक बनी हुई है। इससे आसपास के सहमे लोग विभागीय कर्मचारियों के साथ ही पूरी रात जागकर बांध की रखवाली करते नजर आ रहे हैं।
1998 में टूटे थे तीन बांध
वर्ष 1998 में राप्ती नदी का जलस्तर 85.82 था, जबकि वर्तमान में इसका जलस्तर 85.84 तक पहुंच गया है। 1998 में बाढ़ की वजह से 52 लोगों की मौत हुई थी। 481 पशुओं की भी जान गई थी। जिले के सभी 2545 राजस्व गांवों में 1693 गांव बाढ़ प्रभावित हुए थे और 1053 गांव मैरूंड हो गए थे। उस वर्ष तीन बांध टूटने से ज्यादा तबाही हुई थी। इसके साथ ही नौगढ़-बांसी, बांसी इटवा समेत कई मार्ग बंद हो गए थे और 11.65 लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई थी। 1.26 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल की फसल नष्ट हो गई थी।