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39 दिन कोमा में रहने वाले रामबरन की मौत, बेसहारा हुई बेटी

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39 दिन कोमा में रहने वाले रामबरन की मौत, बेसहारा हुई बेटी
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शोहरतगढ़। जोगिया कोतवाली क्षेत्र के कटया में 21 मई को हुए सड़क हादसे में घायल शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र महला निवासी रामबरन (50) की बुधवार शाम बीआरडी मेडिकल में इलाज के दौरान मौत हो गई। रामबरन, बीआरडी मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में भर्ती थे। वह 39 दिनों से कोमा में थे। उनके परिवार की इकलौती सदस्य पुत्री निशा बेसहारा हो गई है।
घायल रामबरन की मौत के बाद जोगिया हादसे का जख्म फिर उभर गया। 21 मई की रात में बरात से वापस आ रही बोलेरो के सामने खड़े ट्रेलर में भिड़ जाने से सात लोगों की मौत हो गई थी। चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उसी हादसे में घायल रामबरन कोमा में चले गए थे। उनके परिवार में इकलौती बेटी निशा ही है। पट्टीदारों व रिश्तेदारों ने रामबरन की सेवा में अथक प्रयास किया, लेकिन अंतत: उन्हें जान बचाने में कामयाबी नहीं मिली।
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बेटी की बात सुनकर नम हो गईं आंखें
रामबरन का शव घर लाया गया तो बेटी निशा दहाड़े मारकर रोने लगी। निशा कह रही थी कि मां पहले चल बसी। एक पिता सहारा थे। भगवान ने उन्हें भी छीन लिया। अब वह कैसे रहेगी? आसपास के लोग उसे ढांढस बंधा रहे थे। ढांढस बंधाने वाले भी अपने आंसू नहीं रोक पा रहे थे। रामबरन के भाई ने उन्हें मुखाग्नि दी।
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इलाज में बढ़े थे मदद के लिए हाथ
रामबरन के इलाज में रिश्तेदारों ने आर्थिक सहयोग किया था, जबकि जिला प्रशासन ने दो बार में 30 हजार रुपये मदद दी थी। हादसे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर दुख जताते हुए मृतकों के परिजन दो-दो लाख रुपये व घायलों को 50-50 हजार रुपये देने की घोषणा की थी, लेकिन यह राशि अभी प्राप्त नहीं हुई है।
हादसे में हो गई थी भतीजे की मौत
हादसे में रामबरन के भाई राजाराम के पुत्र रवि (18) की मौत हो गई थी। परिवार के लोग इस मौत से उबर नहीं पाए थे कि रामबरन ने भी दम तोड़ दिया।
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