बारिश ने बढ़ाई किसानों की मुसीबत
सिद्धार्थनगर। पिछले तीन-चार दिनों से रुक-रुककर हो रही बारिश से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। गेहूं की फसल के साथ दलहन और तिलहन की फसल पर बेमौसम बारिश भारी पड़ सकती है। महंगाई की मार झेल रहे किसानों को एक बार फिर खेती में लगाई गई गाढ़ी कमाई के डूबने का डर सताने लगा है।
जिले में रुक-रुक कर हो रही बारिश ने किसानों के चेहरों की रंगत फीकी कर दी है। बीती रात हुई तेज बारिश से फसलों के नुकसान होने का डर बढ़ गया है। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में एक समान बारिश नहीं हुई है। कहीं ज्यादा तो कहीं कम हुई। नौगढ़ और शोहरतगढ़ क्षेत्र में बारिश ज्यादा होने से कुछ इलाकों में गेहूं बोए खेतों में पानी भर गया है। ऐसे में गाढ़ी कमाई लगाकर खेती करने वाले किसानों की चिंता बढ़ गई है। धान की फसल के नुकसान के बाद अब उन्हें गेहूं की फसल के बर्बाद होने का डर सताने लगा है।
शोहरतगढ़ तहसील के ग्राम साहा, पकड़ी, सिरवत, ससना, पलिया टेकधर, मनोहरी, बनरही सहित क्षेत्र के विभिन्न गांवों में बारिश ने खूब तबाही मचाई। आलू, सरसों, गेहूं आदि की फसलों में पानी भर गया। महंगाई से त्रस्त किसानों के लिए फसलों का नुकसान किसी आफत से कम नहीं है। किसान प्रताप नारायण शुक्ला, अनिल कुमार पांडेय, केसरी चौधरी, रमेश चंद्र शुक्ल आदि ने बताया कि बारिश ने उनकी सारी मेहनत पर पानी फेेर दिया है। कृषि विज्ञान केंद्र, सोहना के कृषि वैज्ञानिक डॉ. मार्कंडेय सिंह ने बताया कि पहले बोई गई गेहूं की फसल के लिए यह बारिश लाभदायक ही साबित होगी।
हालांकि, जिन किसानों ने बाद में गेहूं की बुवाई की है, उनके लिए थोड़ा नुकसानदायक जरूर हो सकता है। अच्छी पैदावार के लिए किसानों को चाहिए कि वे 20 किग्रा. प्रति एकड़ के हिसाब से यूरिया अथवा 500 एमएल प्रति एकड़ के हिसाब से नैनो उर्वरक का इस्तेमाल गेहूं की फसल में करें। उन्होंने बताया कि बारिश के दौरान तेज हवा नहीं चली, जिससे दलहन और तिलहन की फसल को बहुत नुकसान होंने की आशंका नहीं है। जिन खेतों में पानी भर गया हो उसमें से पानी निकालने की व्यवस्था किसानों को जरूर करनी चाहिए। साथ ही एक लीटर पानी में दो ग्राम सल्फर का घोल बनाकर छिड़काव करें। ऐसा करने से दलहन और तिलहन की फसलों को नुकसान से बचाया जा सकता है।