सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक में खून की कमी हो गई है। ऐसे में जिले में कोई बड़ा हादसा होता है तो खून के अभाव में मरीजों की जान जा सकती है। मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक में मात्र आठ यूनिट खून बचा हुआ है। जबकि निगेटिव ग्रुप का एक भी यूनिट खून नहीं है। ए पाॅजिटिव ग्रुप का भी खून नहीं है।
मेडिकल कॉलेज में संचालित हो रहे ब्लड बैंक के भरोसे जिले के 27 लाख आबादी है। लेकिन ब्लड बैंक में खून की कमी होने से लोगों के मन में हादसे की आशंका बनी रहती है। प्रतिदिन जिले में 100 से अधिक प्रसूता महिला अपना इलाज करवाने के लिए आती है। जिसमें से लगभग 10 से अधिक महिलाओं को खून की जरूरत पड़ती रहती है। लेकिन ब्लड बैंक में खून की कमी होने पर लोगों को खून के लिए भटकना पड़ता है। जबकि इमरजेंसी होने पर लोगों को उस ग्रुप के व्यक्ति को ढूंढना पड़ता है। ऐसे में समय से खून नहीं मिलने के अभाव में लोगों की जान भी जा सकती है। 22 फरवरी से बोर्ड परीक्षा भी शुरू होने वाली है।
भगवान न करें इस दौरान यदि कोई हादसा हो गया तो ब्लड की व्यवस्था कैसे होगी? पिछले वर्ष ही डुमरियागंज में इंटर की परीक्षा देने जा रहे एक साथ तीन छात्रों का हादसा हो गया था। हालांकि उनको ब्लड की आवश्यकता नहीं पड़ी थी। लेकिन बड़ा हादसा होने से इंकार भी नहीं किया जा सकता है। ब्लड बैंक से दोनों पड़ोसी जिले के ब्लड बैंक की दूरी लगभग 70 किमी है। जहां से ब्लड आने में हादसे को इंकार नहीं किया जा सकता है।
ब्लड बैंक में खून की कमी दूर करने के लिए कैंप लगवाने के लिए प्रतिनिधियों से कहा गया है। जल्द ही ब्लड बैंक में खून की कमी दूर कर दी जाएगी।
-डॉ एके झा, प्रभारी प्राचार्य मेडिकल कॉलेज