सिद्धार्थनगर। शहर से गांव तक सरकारी भूमि पर कब्जा करने की शिकायतों की भरमार है। शहर अथवा गांव की सड़क किनारे स्थित कीमती सरकारी जमीनों को हड़पने की लालच में कब्जाने वाले अधिकारियों से उलझने में भी पीछे नहीं हट रहे। जिले में लगातार ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं। शहर के निकट महरिया गांव में सरकारी 40 बीघा भूमि खाली कराने स्वयं डीएम पवन अग्रवाल पहुंचे थे। जिनके जाने के बाद कब्जाकर बुआई गई गेहूं की फसल पलटने के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। ग्रामीणों के विरोध के बीच पुलिस बल पहुंचने के बाद ही ट्रैक्टर चालक फसल की जुताई कर सका।
महरिया गांव में सरकारी भूमि पर कब्जा हटाने के लिए राजस्वकर्मियों को कई बार निर्देशित किया गया था, लेकिन कब्जा नहीं हट सका था। डीएम के सख्ती के बाद ही वहां सरकारी भूमि खाली हो सकी। इसके ठीक एक दिन बाद शोहरतगढ़ तहसील के जम्हिरिया गांव में सड़क किनारे स्थित बानगंगा नदी की सरकारी भूमि पर कब्जाने के लिए बवाल हो गया। बिना पुलिस बल यहां पैमाइश करने गए कानूनगो देवानंद का आरोप है कि पैमाइश के दौरान कुछ ग्रामीणों ने उन्हें घेरकर पीटा और जान से मारने की धमकी दी। इससे पहले भी जिले में विभिन्न स्थानों पर सरकारी भूमि से कब्जा हटाने के दौरान बवाल हो चुके है।
शहर अथवा गांव में सरकारी भूमि पर कब्जा हटाने को अगर राजस्व टीम पर्याप्त पुलिस बल के साथ मौके पर नहीं गई तो वहां बवाल होना तय है। ऐसे में जिले के पांचों तहसीलों में सैंकड़ों बीघा सरकारी भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराना प्रशासन के लिए चुनौती बनती जा रही है।
चार तहसीलों में 400 बीघा है सीलिंग भूमि
नौगढ़ तहसील में दो गाटा सीलिंग भूमिका रकबा 210 बीघा भूमि खाली नहीं हो सकी है। इसमें तेतरी सोहांस मार्ग पर पिठनी पुल के पास 90 बीघा व बर्डपुर क्षेत्र के हरिदासपुर में 120 बीघा सीलिंग भूमि शामिल है। शोहरतगढ़ में 150 गाटे की 96 बीघा सीलिंग भूमि, इटवा में 80 गाटा की 40 बीघा भूमि डुमरियागंज में भी सौ गाटे की 56 बीघा सीलिंग भूमि उपलब्ध है, जो वर्तमान में दूसरे के कब्जे में है। इन भूमियों के अलावा भी इन तहसीलों में सीलिंग भूमि की तलाश की जा रही है। जबकि बांसी तहसील में प्रशासन सीलिंग भूमि की तलाश नहीं कर सका है जबकि इस तहसील में जिले के दो बड़े जमीदार घराने और एक राजघराने की भूमि है।
भूमि नहीं मिलने से अटकी कईं परियोजनाएं
औद्योगिक निवेश के लिए जिले में कई बार इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन किया गया है, लेकिन अभी तक उद्योगों की स्थापना के लिए औद्योगिक क्षेत्र के लिए भूमि नहीं मिल सकी है। प्रशासन इसके लिए एकमुश्त सौ बीघा से अधिक भूमि की तलाश में जुटा हुआ है। सभी ग्राम पंचायतों में ग्राम सचिवालय स्थापना योजना के तहत जिले के 12 ग्रामों में भूमि नहीं होने से पंचायत भवन नहीं बन सके है। वहीं लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने की योजना के तहत 50 से अधिक ग्रामों में ओवरहेड टैंक के लिए जगह की तलाश पूरी नहीं हो सकी है। इसके साथ ही कई गांवों में सरकारी भूमि के अभाव में सामुदायिक शौचालयों का निर्माण नहीं हो सका है।
सरकारी भूमि कब्जाने में कई वृद्ध की जान
जोगिया थाना क्षेत्र के सोनौरा गांव में एक माह पूर्व सरकारी गड्ढे की जमीन पर कब्जे को लेकर दो पक्ष में आपस में भिड़ गए, जिसमें हुई मारपीट में एक वृद्ध की मौत हो गई। मामले में दर्ज हत्या के केस में दो लोग जेल जा चुके है।
विरोध पर राजस्व टीम को लौटना पड़ा था वापस
लोटन थाना क्षेत्र के मुड़िली गांव में सरकारी भूमि पर कब्जा हटाने गए तहसील प्रशासन से ग्रामीण भिड़ गए। महिलाओं के सामने आने से प्रशासन को बिना कब्जा हटाए वापस लौटना पड़ा, बाद में महिला पुलिस की मौजूदगी में प्रशासन कब्जा हटाने में सफल हो पाया।
सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराने के लिए अभियान चलाने की जरूरत है, ऐसे लोगों से सख्ती की जरूरत है। ताकि इन भूमियों का उचित उपयोग हो सके।
-कृपाशंकर त्रिपाठी, अधिवक्ता
अधिकांश मामलों में राजस्वकर्मियों के लापरवाही एवं संलिप्त होने से भी सरकारी भूमि कब्जामुक्त नहीं हो पाता है, इसके लिए अभियान की जरूरत है।
-अनिरुद्ध यादव, अधिवक्ता