संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। संयुक्त जिला चिकित्सालय की पैथोलॉजी में जांच के लिए प्रयुक्त होने वाले केमिकल सिर्फ एक सप्ताह के ही हैं। ऐसे में यदि जल्द केमिकल नहीं मिले तो आने वाले समय जांच में दिक्कत हो सकती है। इस मामले में चिकित्सा शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों में बीते नौ जुलाई से पत्राचार जारी है।
संयुक्त जिला चिकित्सालय को मेडिकल कॉलेज से संबद्ध होने के बाद बजट की समस्या शुरू हुई है। जब जिला चिकित्सालय का संचालन स्वास्थ्य विभाग से होता था तो डीजीएमएच (डायरेक्टर जनरल मेडिकल हेल्थ) के हेड से बजट आता था, अब डीजीएमई (डायरेक्टर जनरल मेडिकल एजुकेशन) से बजट प्राप्त होना है। जिला चिकित्सालय को मेडिकल कॉलेज से संबद्ध होने के बाद पहली अप्रैल से डीजीएमएच से बजट प्राप्त होना बंद हो गया है।
जिला चिकित्सालय की सीएमएस डॉ. नीना वर्मा ने मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सलिल श्रीवास्तव से पत्र लिखा है। इस मामले में प्राचार्य ने पत्र को स्टोर कमेटी के पास भेजा है। फिलहाल यह तय नहीं हुआ है कि पैथोलॉजी के लिए बजट कहां से प्राप्त होगा।
डॉक्टरों के अनुसार, कोरोना संक्रमण के दौरान जांच की संख्या कम थी। ऐसे में बचा हुआ केमिकल अधिक समय तक काम आया। एक वर्ष में 60 से 75 लाख रुपये के बजट में पैथोलॉजी का संचालन होता है। प्रतिदिन 500 से अधिक मरीजों की जांच होती है। यहां 36 प्रकार की जांच की सुविधाएं हैं। सीएमएस डॉ. नीना वर्मा ने बताया कि उन्होंने पैथोलॉजी में जांच के केमिकल की व्यवस्था के लिए प्राचार्य को पत्र लिखा गया है। फिलहाल एक सप्ताह के लिए केमिकल बचा है।
मेडिकल कॉलेज के अंतर्गत जिला अस्पताल का संचालन शुरू होने के बाद बजट प्राप्त करने के नियम में बदलाव हुआ है। अब 15 दिन पहले ही आर्डर करना होगा। पैथोलॉजी के लिए केमिकल की व्यवस्था समय से की जाएगी। नियम के अनुसार ही खरीदारी होगी।
- डॉ. सलिल श्रीवास्तव, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज