संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। बुद्ध के प्रसाद के रूप में प्रचलित हाे रहे कालानमक की ब्राडिंग, मार्केटिंग और भंडारण के लिए बड़ा काम होने जा रहा है। एक कैंपस में कामन फेसिलिटी सेंटर, वेयरहाउस और राइस टेस्टिंग बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई। इसके लिए सदर तहसील क्षेत्र के जोगिया- पकड़ी मार्ग पर स्थित महदेवा में तीन एकड़ जमीन चिह्नित किया है। जल्द ही इस पर काम शुरू हो जाएगा।
एक कैंपस में तीन सुविधा होने से जहां किसानों को धान की कुटाई और रखने में सहूलियत मिलेगी। वहीं, टेस्टिंग लैब में चावल में मिलने वाले तत्व और गुणवत्ता के आरे में जानकारी होगी, जिससे कमी पर सुधार होगा। इसमें देश के कृषि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ और वैज्ञानिक समय-समय पर आएंगे और कार्यशाला के जरिए किसानों को जानकारी देंगे।
एक जनपद एक उत्पाद में चयनित होने के बाद शुरू हुई कालानमक धान को बढ़ावा देने की पहल : नेपाल सीमा से सटे सिद्धार्थनगर को प्रदेश के तराई क्षेत्र में गिना जाता है। यहां बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है और मुख्य रूप से दो प्रकार की फसल लगती है। इसमें गेहूं और धान दो हैं। तकरीबन डेढ़ लाख हेक्टेयर भूमि पर दोनों खेती होती है।
खरीफ के सीजन में बाढ़ का प्रकोप रहता है। जानकार बताते हैं कि इसलिए बड़े डील वाले लोग धान की खेती करते थे। इसमें कालानमक धान प्रमुख रहा है, जिसे कालानमक चावल बुद्ध के प्रसाद के रूप में जाना जाता है, लेकिन पैदावार में कमी और बाजार में बिक्री न होने के कारण वर्ष 2005 के बाद रकबे में गिरावट होने लगी।
किसानों का कहना था कि कद बड़ा होने के कारण गिरता है, जिससे कटाई में दिक्कत होती है। मजदूरी अधिक लगती है। लागत के अनुसार उत्पादन नहीं होने से किसान घाटे में जा रहा था। इसलिए खेती का रकबा कम करने लगा और स्थिति यह बनी कि 2015 तक आते-आते तीन हजार हेक्टेयर पर आ गया। विभाग से जुड़े लोगों के मुताबिक 20 हजार से तीन हजार हेक्टेयर रकबे पर आ गया, लेकिन वर्ष 2017 में जब भाजपा सरकार में एक जनपद एक उत्पाद में चयनित किया गया।
इसके बाद इसके प्रोत्साहन पर काम शुरु हुआ। मौजूदा 12 हजार हेक्टेयर से अधिक रकबे पर कालानमक धान की खेती हो रही है, लेकिन कई प्रजाति का धान होने के कारण गुणवत्ता पर सवाल उठने लगा। इसलिए बाजार प्रभावित हो रहा है, जिससे किसान परेशान हैं।
किसान खेती से मुंह न मोड़े और गुणवत्ता का संकट खत्म हो जाए। इसलिए गुणवत्ता और पुरानी प्रजाति पर काम शुरू किया गया है। इसमें चावल की कुटाई से लेकर खुशबू बनी रहे, इसके लिए भंडारा पर जोर दिया गया है। इसके लिए एक छत के नीचे कुटाई, भंडारा और पैकिंग के साथ टेस्टिंग पर काम शुरू होने जा रहा है।
तीन एकड़ के कैंपस में तीनों प्रकार की सुविधाएं होंगी। इसके लिए भूमि चिह्नित करने के साथ- साथ कागजी कार्य आखिरी चरण में है। शासन से स्वीकृति और बजट आवंटित होते ही काम शुरु हो जाएगा। विभाग से जुड़े लोगों के मुताबिक आने वाले दिनों जनपद ही नहीं आसपास के जनपद में कालामनक की खेती को बढ़ावा मिलेगा और किसानों को लाभ मिलेगा।
कालानमक बोर्ड का हो चुका है गठन : कालानमक धान की खेती उसकी समस्या और बाजार को लेकर कालानमक बोर्ड का गठन किया गया। इसमें जिला स्तर के अधिकारी के अलावा किसान और वैज्ञानिक व कारोबारी सदस्य बनाए गए हैं। इसमें किसानों बैठक में किसानों की समस्या को सुनने के साथ- साथ निस्तारण और बाजार में बिक्री करवाने का भी काम यह बोर्ड करेगा। इसके लिए कालानमक बोर्ड का भवन भी बन गया है।