अब बिना पंजीकरण के नहीं चलेंगे आरओ प्लांट
सिद्धार्थनगर। बढ़ते जलदोहन से होने वाले संकट को देखते हुए शासन ने आरओ प्लांट सहित जल व्यवसाय से जुड़े कार्यों के लिए पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। बिना पंजीकरण के ऐसा कोई व्यवसाय पाए जाने पर दो से पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है और दो वर्ष तक कारावास की सजा भी हो सकती है। शासन ने भूजल संकट और बिना किसी अनुमति के तेजी से बढ़ती जन उद्योग इकाई को देखते हुए यह निर्णय लिया है।
बीमारी से बचाव के लिए लोग शुद्ध पानी का सेवन करने की कोशिश कर रहे हैं। सभी की यह सोच है कि आरओ का पानी पीएं। इससे आरओ प्लांट के कार्य तेजी से विकसित हो रहे हैं। गांव से लेकर शहर तक पानी का बड़ा कारोबार हो रहा है। आरओ प्लांट के नाम पर मोटर लगाकर जमीन से पानी खींचा जा रहा है।
फिल्टर करने में बड़ी मात्रा में पानी की बर्बादी हो रही है। इसके कार्य के लिए पंजीकरण कराना भी लोग वाजिब नहीं समझ रहे हैं। जलदोहन से भूजल के स्तर में गिरावट स्थिति बन रही है। ऐसे में शासन ने पानी से जुड़े व्यवसाय के लिए पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है। अब पंजीकृत न होने पर इकाई नहीं चल सकेगी। इसके लिए शासन की ओर से निर्देश जारी हुआ। मामले को संज्ञान में लेते हुए जिलाधिकारी ने निर्देशों का कड़ाई से पालन कराने के लिए जिम्मेदारों को निर्देश भी दिए हैं। ऐसे में बिना पंजीकरण कारोबार करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में जिलाधिकारी संजीव कुमार रंजन ने बताया कि पंजीकरण कराना अनिवार्य है। बिना पंजीकरण प्रमाणपत्र के प्लांट चलाते हुए मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
इन कार्यों के लिए पंजीकरण अनिवार्य
आरओ प्लांट, सामूहिक उपयोगकर्ता जैसे होटल, लॉज, आवासीय कालोनियां, निजी चिकित्सालय, सर्विस सेंटर, गाड़ी धुलाई का व्यवसाय, माल्स और वॉटर पार्क आदि के लिए पंजीकरण आवश्यक है। अगर पंजीकरण नहीं है और संचालन करते हुए पाए गए तो दो से पांच लाख रुपये जुर्माना और छह माह से दो वर्ष की कारावास की सजा होगी।
यहां करा सकेंगे पंजीकरण
पंजीकरण और प्रमाणपत्र लेने के लिए कारोबार करने वाले निवेश मित्र पोर्टल पर जाकर उत्तर प्रदेश भूजल गर्भ विभाग में ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यहां से आवेदन के बाद ऑनलाइन प्रमाणपत्र जारी होगी।