सहयोगी दलों के पर्चा खरीदने से शोहरतगढ़ में बढ़ी हलचल
: सपा और भाजपा ने शोहरतगढ़ से तय नहीं किया है प्रत्याशी
: सपा की भासपा व भाजपा की सहयोगी अपना दल एस. ने लिया पर्चा
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के बाद भी शोहरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र से सपा और भाजपा के प्रत्याशी तय नहीं हो पाए हैं। इसी बीच दोनों के सहयोगी दलों के पर्चा खरीदने से पहले से ही बनी असमंजस की स्थिति और बढ़ गई। यहां राजनीतिक पैतरों से मतदाताओं में भी हलचल है। सपा की सहयोगी सुहेल देव भारतीय समाज पार्टी ने और भाजपा की सहयोगी अपना दल (एस) के कार्यकर्ताओं ने पर्चा खरीदा है।
शोहरतगढ़ सीट से वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने प्रत्याशी उतारा था, जबकि भाजपा ने यह सीट सहयोगी अपना दल (एस) के लिए छोड़ दी थी। जिसके टिकट पर चौधरी अमर सिंह चुनाव जीतकर विधायक बने थे। अभी सपा के साथ ही भाजपा ने भी यहां से पत्ता नहीं खोला है। इसी बीच दोनों के सहयोगी दलों के कार्यकर्ताओं ने शोहरतगढ़ सीट से नामांकन पत्र खरीद लिया है, जबकि दोनों दल सहयोगियों के साथ न तो इस सीट के लिए समझौते की घोषणा की और न ही प्रत्याशी तय किए हैं। अपना दल (एस) विधायक चौधरी अमर सिंह अब सपाई हो चुके हैं, वहीं पिछले चुनाव में सपा प्रत्याशी रहे उग्रसेन सिंह और बसपा प्रत्याशी रहे जमील सिद्दीकी भी सपा से टिकट के दावेदारों में शामिल हैं। वहीं भाजपा से जिलाध्यक्ष गोविंद माधव और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष साधना चौधरी के पुत्र सिद्धार्थ चौधरी समेत अन्य टिकट के दावेदारों में शामिल हैं। सहयोगी दलों की तरफ से पर्चा खरीदने से सपा और भाजपा से दावेदारी कर रहे नेताओं का भविष्य अधर में नजर आ रहा है।
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सपा और भासपा दोनों ने खरीदा पर्चा
शोहरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र से सुहेल देव भारतीय समाज पार्टी के चार सेट के साथ ही समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने भी दो सेट में नामांकन पत्र खरीदा है। जिससे इस क्षेत्र में असमंजस है। साथ ही अखिल भारत हिंदू महासभा, आम आदमी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, अपना दल (एस), राष्ट्रवादी जनशक्ति पार्टी, जन अधिकार पार्टी व निर्दल ने भी पर्चे की खरीद की है।
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बांसी में तय नहीं सपा प्रत्याशी
बांसी विधानसभा क्षेत्र में अभी सपा प्रत्याशी तय नहीं हो पाया है। पूर्व में सपा से कई चुनाव में दांव अजमा चुके लालजी यादव वर्तमान में पार्टी के जिलाध्यक्ष हैं। उनके अलावा अन्य कई ने यहां से सपा से दावेदारी की है। वहीं अंदरखाने की माने तो सपा नेतृत्व जिताऊ उम्मीदवार की तलाश में है, जिसमें दूसरे दल के ऐसे चेहरों पर भी नजर है। जिससे टिकट की घोषणा में देरी हो रही है।