- नेपाल की ओर से भारतीय जमीन कब्जा करने के पीएम के बयान के बाद नेपाल में मची है हलचल, बॉर्डर पर भी चर्चा
-जिले की 68 किलोमीटर सीमा नेपाल बॉर्डर से लगती है, पूरी तरह खुली है सीमा बीच में है बॉर्डर के रूप में दसगजा
-नेपाली पीएम बालेंद्र शाह संसद में दिया बयान कि नेपाल ने भी कई जगह पर भारत की जमीन पर किया है कब्जा
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। भारतीय और नेपाल के मधेश इलाके में निवास करने वाली बड़ी आबादी बालेंद्र शाह की अगुवाई में सरकार बनने के बाद बाॅर्डर पर बढ़ने वाली सख्ती, पुराने नियम और कायदे को लागू करने से हैरान थे। इसी बीच नेपाल के पीएम बालेंद्र शाह की ओर से आए भारतीय भूमि पर कब्जे संबंधी बयान के बाद सीमा पर हलचल बढ़ गई है। लोगों का कहना था कि अभी तक भंसार और अन्य नियम के बीच एक माह तक व्यवस्था बेपटरी था। अब एक बार फिर ऐसे बयान से कहीं न कहीं रिश्तों के बीच कड़वाहट बढ़ेगी।
सीमावर्ती इलाका बढ़नी, खुनुवां, अलीगढ़वा और ककरहवा व छोटे बाजार और सीमा से लगे गांव में इस बात की चर्चा आम थी। रिश्ते और बेहतर बनाने और रोजगार पर काम करने की जरूरत बताई गई। लोगों का कहना है कि इस प्रकार के बयान से कड़वाहट पैदा होगी जबकि हमारे रिश्ते बहुत पहले से चले आ रहे हैं। रोटी-बेटी का संबंध है। दो देशों के बीच होनी चाहिए न की किसी तीसरे दखल हो।
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सीमा पर दसगजा की चर्चा
पीएम बालेंद्र शाह के बयान के बीच मचे घमासान पर विदेश मंत्रालय ने दसगजा की बात की है। मंत्रालय का कहना था कि सीमा पर दसगजा में कब्जा के संबंध में पीएम ने बात कही है। नेपाल और भारतीय सीमावर्ती इलाके के जानकार और नेपाल में रक्षा से जुड़ लोगों का कहना है कि दसगजा सीमा के दो देशों का बाॅर्डर तय करता है। दसगजा छोड़कर ही दोनों देश के लोगों को कुछ करना है। नेपाल के नरेंद्र चौधरी के मुताबिक सीमा पूरी तरह से खुली है। सीमांकन के लिए दसगजा पर पिलर लगा होता है। इसमें तीन आकार के पीले होते हैं। बड़े, मध्यम और छोटे आकार के होते हैं। इसमें समय- समय पर दोनों देश की सुरक्षा एजेंसी की मौजूदगी में उस पिलर की गिनती होती है। इसके बाद सफाई के साथ रंगाई-पुताई भी होती है और अगर गायब हो गया है तो नक्शा देखकर कहां था, उस हिसाब सुरक्षा अधिकारियों की मौजूदगी में उसे फिर से स्थापित कर दिया जाता है। लगभग हर साल दसगजा की सफाई और उसे सुरक्षित रखने के लिए अभियान चलता है। गायब होने के मामले तब आते हैं जब बाढ़ आदि आती है। तभी संकट होता है नहीं तो हमेशा निगरानी जारी रहती है।
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बलरामपुर की सीमा से सात गायब होने की बात आई थी सामने
दिसंबर 2023 में दसगजा की पड़ताल और सफाई शुरू की गई। दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों ने जांच शुरू किया तो भारत और नेपाल बार्डर के बीच सरहद के सीमांकन के लिए लगे बलरामपुर जनपद के हिस्से में सात छोटे पिलर के गायब मिले थे। जांच टीम की पड़ताल में गायब होने वाले सात पिलर बलरामपुर जनपद के सीमा के बीच बताए जा रहे हैं। जांच में टीम ने पाया कि भीषण बाढ़ के दौरान नदी और अन्य जलमग्न स्थल पर पिलर लगे होने के कारण क्षतिग्रस्त हो गए थे। ऐसा 28 नंबर गढ़ के तत्कालीन एसएसपी के जांच में सामने आया था। अब उनकी रिपोर्ट के आधार पर पिलर को ढूंढ़कर स्थापित किए गए थे। इसमें समय- समय पर जांच और पिलर को ढूंढ़ने सफाई करने और क्षतिग्रस्त के स्थान पर दूसरा लगाने का काम किया जाता है।
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बोले बार्डर से जुड़े जानकार
सीमावर्ती क्षेत्र के गांव अठकोनियां के सामाजिक कार्यकर्ता आदित्य प्रकाश मिश्रा ने कहते हैं कि नेपाल और भारत के बीच कालापानी, लिपुलेख तथा लिम्पियाधुरा क्षेत्र का विवाद ऐतिहासिक दस्तावेजों से जुड़ा विषय है। 1816 की सुगौली संधि ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और नेपाल के बीच हुई थी, इसलिए उस समय के मूल नक्शे, अभिलेख और दस्तावेज इस विवाद के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।भारत नेपाल का संबंध सदियों से रोटी बेटी के रिश्ते का रहा है और आज भी चलता चला आ रहा है। लोगों का आवागमन अबाध रूप से बिना वीजा, पासपोर्ट के हो रहा है। नेपाल से व्यापारिक गतिविधियां भी सामान्य रूप से हो रही हैं।
वहीं, बगहवा गांव निवासी पूर्व अध्यापक प्रताप बहादुर श्रीवास्तव ने कहा कि प्रधानमंत्री के इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि दक्षिण एशिया की कई सीमाएं औपनिवेशिक काल में निर्धारित की गई थीं, जिनके प्रभाव आज भी दिखाई देते हैं। सीमा विवाद के स्थायी समाधान के लिए ऐतिहासिक तथ्यों और प्रमाणों का निष्पक्ष परीक्षण आवश्यक है, लेकिन भारत द्विपक्षीय वार्ता से हल चाहता है। इस मामले में तीसरे पक्ष की जरूरत नहीं होनी चाहिए। द्विपक्षीय वार्ता के जरिए इस मुद्दे के समाधान की दिशा में सकारात्मक पहल हो सकती है।
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बोले लोग
कुछ सीमावर्ती इलाकों में किसान एक-दूसरे की जमीन का इस्तेमाल करते रहे हैं, लेकिन इसे सरकारी अतिक्रमण नहीं कहा जा सकता। रिश्तों को और बेहतर बनाने की जरूरत है।
राजेश आचार्य, पूर्व जिला सभापति नेपाली कांग्रेस कपिलवस्तु
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दोनों देशों के करीब 97 प्रतिशत सीमा विवाद पहले ही सुलझाए जा चुके हैं। नेपाल की ओर से भारतीय जमीन पर अतिक्रमण का कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। ऐसी स्थिति में इस प्रकार से बयान ठीक नहीं है। अगर कुछ है तो हमारे रिश्ते अच्छे वह कायम रहे, इसे देखते हुए आपस में सुलझाना चाहिए।
कालीपद शर्मा, राष्ट्रीय सह अध्यक्ष, नेपाल सद्भावना पार्टी
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प्रधानमंत्री अपने इस दावे के या तो सबूत दें या फिर बयान वापस लें। अन्यथा इस्तीफा दें। उनका यह बयान राष्ट्रीयता के खिलाफ है। चुनाव के बाद से लगातार अस्थिरता का माहौल बना हुआ है।
अनूप पाण्डेय,पूर्व जिला समन्वय समिति सदस्य व पूर्व मेयर प्रत्याशी
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भारत व नेपाल के बीच रोटी-बेटी का रिश्ता प्राचीन काल से है। नेपाली प्रधानमंत्री का यह बयान दोनों देशों के बीच रिश्तों को खराब करेगा। अभी बाॅर्डर पर सख्ती के कारण न सिर्फ भारतीय लोग प्रभावित हो रहे थे बल्कि नेपाल के मधेश के लोगों के व्यापार कारोबार पर असर पड़ रहा रहा था।
- योगेंद्र तिवारी, पूर्व मंडल अध्यक्ष भाजपा