पराली से बनाएं जैविक खाद : डॉ. ओमप्रकाश
भनवापुर। खुनियांव ब्लॉक मुख्यालय पर कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के वैज्ञानिकों ने बृहस्पतिवार को फसल अवशेष प्रबंधन जागरूकता अभियान के तहत अपनी बात रखी। इस दौरान केंद्र के अध्यक्ष डॉ. ओम प्रकाश वर्मा ने बताया धान की पराली को खेत में जलाने की बजाए इससे गुणकारी खाद तैयार की जा सकती है। उसके इस्तेमाल से मिट्टी की गुणवत्ता बढ़ाई जा सकती है।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप कुमार ने बताया कि अवशेष जलाने से पोषक तत्वों का नुकसान व मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव व पर्यावरण संबंधी दुष्परिणाम व अवशेषों को पशुचारा अथवा औद्योगिक उपयोग के लिए इकट्ठा करना तथा फसल अवशेष प्रबंधन जलाने से मृदा में होने वाली हानियाें को विस्तृत से बताया। कृषि वैज्ञानिक डॉ. एसएन सिंह कहा कि किसी भी दृष्टिकोण से फसल अवशेषों को जलाना उचित नहीं है। अत: किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के इस विकल्प पर अमल करने की जरूरत है।
प्रेम कुमार चौरसिया ने कहा कि संरक्षण कृषि प्रणाली का अंगीकरण व फसल विविधीकरण से अवशेष जलाने की समस्या से निजात मिल सकती है। पराली को खेत में सड़ा दिया जाए तो उर्वरकों की मात्रा को कम डाल कर अच्छी पैदावार गेहूं में ले सकते हैं। इस दौरान विजय तिवारी, रामप्रसाद, प्रेमशंकर, भोलाराम, रामप्रकाश, दीनदयाल, रामशंकर वर्मा, वीर बहादुर यादव, जगतराम आदि मौजूद रहे।