संतकबीरनगर। नाथनगर विकास खंड की ग्राम सभा नाथनगर में विकास कार्यों में भ्रष्टाचार के मामले में लोकायुक्त के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कार्रवाई न होने से जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। जुलाई 2023 में ही संयुक्त जांच रिपोर्ट डीएम को सौंपे जाने और उसके बाद लोकायुक्त के निर्देश के बावजूद दोषियों पर अब तक कार्रवाई नहीं हुई। लोकायुक्त कार्यालय द्वारा बार-बार रिमाइंडर भेजे जाने के बावजूद जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) कार्यालय से कोई आख्या न भेजे जाने के कारण अब जिलाधिकारी पर बाध्यकारी कार्रवाई की तलवार लटक गई है। इस मामले में डीपीआरओ कार्यालय पर प्रकरण को दबाने का आरोप लग रहा है।
लोकायुक्त में दर्ज शिकायत के आधार पर सहायक अभियंता प्रांतीय खंड, वित्त एवं लेखाधिकारी तथा एसडीएम धनघटा की संयुक्त जांच टीम ने 28 जुलाई 2023 को अपनी रिपोर्ट डीएम को सौंपी थी। जांच में ग्राम सभा नाथनगर में कराए गए कई विकास कार्यों में गंभीर अनियमितताएं और भ्रष्टाचार उजागर हुआ था। रिपोर्ट के आधार पर लोकायुक्त ने तत्कालीन ग्राम प्रधान, ग्राम सचिव और संबंधित फर्म के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश देते हुए दोषी कर्मियों पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी थी। इसके बावजूद डीपीआरओ स्तर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। लोकायुक्त कार्यालय की ओर से चार बार रिमाइंडर भेजे जाने के बाद भी न तो आख्या उपलब्ध कराई गई और न ही दोषियों के विरुद्ध की गई कार्रवाई की जानकारी दी गई। इस कारण अब डीएम पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है।
सचिव लोकायुक्त डॉ. रीमा बंसल ने 11 दिसंबर 2025 को डीएम को पत्र भेजकर अवगत कराया कि 15 अप्रैल 2025 को भेजे गए पत्र में दोषी कर्मियों के संबंध में लिए गए निर्णय की सूचना 29 अप्रैल तक मांगी गई थी। सूचना न मिलने पर 14 जुलाई, 10 अक्टूबर और 7 नवंबर को भी पत्र भेजे गए, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। पत्र में निर्देश दिया गया कि 16 जनवरी तक संबंधित जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए, अन्यथा बाध्यकारी कार्रवाई पर विचार किया जाएगा। बताया जा रहा है कि डीएम कार्यालय की ओर से 23 दिसंबर को ही लोकायुक्त के आदेश की प्रति डीपीआरओ कार्यालय को भेज दी गई थी, लेकिन आरोप है कि डीपीआरओ कार्यालय में पत्रावली दबा दी गई।
यह है मामला
ग्राम सभा नाथनगर में वर्ष 2020-21 के दौरान कराए गए विकास कार्यों में भ्रष्टाचार की शिकायत गांव निवासी विनय कुमार ने जून 2023 में लोकायुक्त से की थी। लोकायुक्त के निर्देश पर डीएम ने सहायक अभियंता प्रांतीय खंड, वित्त एवं लेखाधिकारी तथा एसडीएम धनघटा की संयुक्त जांच टीम गठित की। जांच टीम ने स्थलीय जांच में गंभीर खामियां पाईं और 28 जुलाई 2023 को रिपोर्ट सौंप दी थी। इसके बावजूद अब तक किसी के विरुद्ध कार्रवाई नहीं हुई।
लोकायुक्त जांच में इन कार्यों में उजागर हुआ था भ्रष्टाचार
-गुलाम की डेयरी से तफज्जुल के घर तक पिच खड़ंजा व नाली निर्माण के नाम पर 7,49,809 रुपये खर्च दिखाए गए, जबकि मौके पर कोई कार्य नहीं मिला।
- बिना उच्चाधिकारी की अनुमति 60 सोलर लाइट पर 13,27,200 रुपये खर्च किए गए, जबकि जांच में केवल 48 लाइट लगी पाई गईं।
-14वें वित्त से कराए गए इंटरलाकिंग, नाली, ढक्कन निर्माण और कूप मरम्मत समेत कई कार्यों में नाम बदलकर भुगतान कर सरकार को लाखों रुपये की क्षति पहुंचाने की पुष्टि हुई।
अफसर बोले-
-मामले की जानकारी नहीं है। इस प्रकरण के बारे में जानकारी जुटाई जाएगी, जो भी दोषी होगा, उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। -आलोक कुमार, डीएम
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-प्रकरण संज्ञान में नहीं है। मामला काफी पुराना है। अब इसकी पत्रावली देखने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। अगर जांच में कोई दोषी है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -मनोज कुमार, डीपीआरओ