सिद्धार्थनगर। जिले में यातायात नियमों की अनदेखी जारी है। वहीं करोड़ों रुपये के राजस्व की भी क्षति हो रही है। इसके लिए उप संभागीय परिवहन विभाग और पुलिस महकमा सीधे तौर पर जिम्मेदार है। बावजूद इसके इस पर जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं। स्थिति यह है कि जिले में एक भी प्रदूषण जांच केंद्र नहीं है। इसके कारण प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र लोगों को नहीं मिल पा रहा है। ऊपर से वाहन चालकों का अपना तर्क है कि जब प्रदूषण प्रमाण पत्र की जांच होती ही नहीं, तो इसकी जरूरत ही क्या है?
यातायात नियम के मुताबिक हर छह माह में दो पहिया और चार पहिया वाहनों के प्रदूषण की जांच होनी चाहिए। अगर वाहनों का प्रदूषण प्रमाण पत्र नहीं है तो एक हजार से लेकर दो हजार रुपये का तक के जुर्माने का प्रावधान है। इसके बाद भी वाहन चालक और विभाग इसे लेकर गंभीर नहीं है। जबकि प्रदूषण की समस्या से पूरा देश परेशान है। सुप्रीम कोर्ट भी इस मामले में कड़ी टिप्पणी कर प्रदूषण पर रोक लगाने के आदेश दिए हैं। इसके बाद भी इस पर कोई कारगर कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।